कमर दर्द के इलाज से बेहतर है रोकथाम

Treatment for Back Pain in Hindi

कमर में होने वाला वह दर्द है, जो आम तौर पर मांसपेशियों, तंत्रिका, हड्डियों, जोड़ों या रीढ़ की अन्य संरचनाओं में महसूस किया जाता है। कमर को स्वस्थ रखने के लिए किसी को भी इन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। Read Treatment for Back Pain in Hindi (Kamar Dard ka Ilaj)

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Treatment for Back Pain in Hindi

(Kamar Dard Ka Ilaj)

एक्सरसाइस(Exercise):

  • कमर की समस्याओं के लिए नियमित एक्सरसाइस सबसे शक्तिशाली हथियार है।
  • कमर दर्द में योगासन से आप कमर दर्द के दौरान ना सिर्फ दर्द से निजात पा सकते हैं बल्कि कमर दर्द की समस्या से भी बच सकते हैं।
  • फैट कम करने के लिए योगासन कर सकते है जो आपका वजन कम करने और आपको स्वस्थ एवं तंदूरस्त रखने में सहायक है।
  • कमर की मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन बढ़ने से वजन सही तरीके से बंट जाता है और रीढ़ की हड्डी पर कम दबाव पड़ता है।
  • कमर की मांसपेशियों को मजबूत बनाना भी कमर दर्द का उपचार करने का ही एक कदम है।

आहार(Diet):

  • पहली नजर में, आहार कमर को स्वस्थ रखने के लिए एक अजीब कारक लग सकता है लेकिन हमेशा वजन नियंत्रण करने के लिए संतुलित आहार चार्ट बनाये रखने की सलाह दी जाती है जो कमर को स्वस्थ बनाये रखने में महत्त्वपूर्ण है।
  • ज्यादा वजन कमर पर दबाव बढ़ाता है और संतुलन बिगाड़ देता है।
  • वजन घटाने और नियंत्रित करने का सबसे बढि़या तरीका हैः
  1. संतुलित आहार का सेवन
  2. नियमित एक्सरसाइस
  • याद रखे कि फैट युक्त आहार और जल्दी वजन घटाने के कामक्रमों से दुर रहें।

चिकित्सकीय सलाह(Medical advice):

  • अगर आवश्यक हो तो कोई भी व्यक्तिगत अभ्यास/एक्सरसाइस और घर पर देखभाल की योजना या संशोधित काम योजना बनायें।
  • सर्जिकल प्रबंधनः- कमर दर्द के कारण के आधार पर सर्जिकल उपचार की योजना बनाई जा सकती है।

फिजियोथैरेपी से(From Physiotherapy):

  • तेज कमर दर्द दुर करने के उपाय जैसे इंटरफेरेन्सियल थैरेपी, अल्ट्रासाउण्ड या शॉर्ट वेव डाइथर्मी आदि की जा सकती है। कमर दर्द के कारण के आधार पर पेल्विक ट्रैक्शन (रूक रूक कर या लगातार) दिया जा सकता है।
  • रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियों को मजबुत बनाने के साथ-साथ सही मुद्रा जैसे फर्श से कोई वस्तु उठाते समय कुल्हे और घुटने खोल कर आगे नहीं झुकना चाहिए आदि के बारे में भी बताया जाता है।
  • मरीजों को काम करते समय बैठने, खड़े रहने या वजन उठाते समय सही मुद्रा बनाये रखने की सलाह दी जाती है।

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