Students के लिए विचार Thoughts for Students in Hindi

Study Tips in Hindi


हम हमेशा से ये ही चाहते है कि हमारे बच्चे school में बहुत अच्छा perform करे कि वो first आये, उनके teachers उनकी बहुत तारीफ पर तारीफ करे, वो अपना homework time पर करे, उन्हें कभी punishment ना मिले। हम ये सब हमारे बच्चो के लिए इसलिए चाहते है क्योकि हम school की success को लाइफ से relate करते है। हमारे लिए हमारे बच्चो का first आना इतना important है कि उसके लिए हम उन्हें school में 8 से 2 रहने के बावजूद, खाना खिलते ही फिर से tuition पर भेज देते है। हमारे लिए हमारे बच्चे की school में success life की success की एक पैमाना है। क्योकि वो अच्छे से पढ़ेगा तो अच्छी नोकरी पर लगेगा, फिर वो एक अच्छा घर खरीद सकता है और अच्छे से अपने परिवार का पालन पोषण कर सकता है पर हो कुछ उल्टा ही हो रहा है।  Infact 70-80% बच्चो के साथ कुछ बहुत ही confusing हो जाता है। Read Thoughts for Students in Hindi

Study Tips in HindiStudy Tips in Hindi

(School Mein Safal Hona Jaruri Nahi)

हम धीरे धीरे ऐसे लोगो से मिलने लगते है जो school में तो first आये है पर life में fail हो जाते है। जो बच्चे school में बहुत मुश्किल से पास होते थे वो आज खुश है, खूब कमा रहे है और बहुत ऐशो आराम से अपनी जिंदगी जी रहे है। स्कूल में हमे क्या सिखाया जाता है – कि हमे अपने teachers को satisfy करना है, हमेशा बड़ो कि बात माननी है, जो बच्चे शुरू से ही इतना obedient रहना सीख जाते है वो आज या तो बहुत ही नीची post पर काम कर रहे है या थोड़ी सी salary बढ़ाने के चक्कर में एक शहर से दूसरे शहर तक भटकते रहते है।

जो school में first आना guaranteed success की और इशारा करता था वो न जाने कब future की कब्र में जा बसता है। पर इसमें इतना surprise होने की क्या बात है। हमारे school का curriculum इस तरीके से design ही नही किया गया है कि वो हमे एक fulfilled औऱ satisfactory adult life की ओर ले जा सके।

हमारे school का curriculum आज का नही बल्कि सालों पुराणी सोच की एक उपज है। जिसका आज के time पर ज्यादा validity नही है। आप खुद ही सोचिये- Battle of Panipat किस date या किस साल में लड़ा गया था क्या ये रटना इतना important है? कोई युद्ध लड़ा गया था तो वो क्यों लड़ा गया था ये जाना जा सकता है पर वो युद्ध exactly किस तारीख को लड़ा गया था इसका हमारी जिंदगी और आने वाली जिंदगी से क्या सम्बन्ध है। School हमे ये suggest करता है जो भी important चीजे है इस दुनिया में वो सब हमे पता हो – हमे तो बस तोते की तरह रटना है ताकि हमें सब कुछ याद हो जाये।

2nd fact, 9th and 10th standers में भी जिन books में answers पहले से लिखे हुए होते है वही answer हमें copy में फिर से लिखने के लिए दिए जाते है ताकि रटने में रही कसर भी पूरी हो जाये।

आप किसी भी school के बच्चे से पूछ लीजिये, वो आपको बताएगा की अगर वो किसी question का answer थोड़े भी madam के बताये गए answer से अलग लिखता है तो उसके marks cut कर दिए जाते है। हमारे teachers हमें ये सिखाते है कि हमें जैसे वो चाहते है वैसे deliver करना है ना कि उनकी या इस दुनिया की expectation को change करना है।

School में वो सब चीजे सिखाई जाती है बजाए उन चीजो के जो हमारे लिए सबसे ज्यादा important है। School में हमें relationships के बारे में, व्यवहार के बारे में, लोगों से मिलने झूलने के बारे में, लोगों से सिखने के बारे में या सही लोगों का चुनाव करने के बारे में कुछ भी नही सिखाया जाता है।

3rd fact, हमें लोगों से compete कैसे करना है उसके बारे में सिखाया जाता है। हमें circle की circumference को कैसे मापन है ये तो सिखाया जाता है, हमें triangle का area मापन तो सिखाया जाता है पर हमें self esteem, self worth और confidence के बारे में कुछ भी नही सिखाया जाता है।

हमारा काम और हमारी love life, हमारी relationships हमारी ज़िन्दगी का सबसे important भाग है पर उसका क्या ज़िन्दगी का एक रटा answer है? बच्चे चीजो को absorb करना सीखे। क्योकि वो ध्यान ही लगाएंगे तो वो analyze ही नही कर पाएंगे की क्या सही है और क्या गलत।

जो बच्चे बाहर punishment में खड़े रहते है या जो पीछे बैठकर मस्ती करते रहते है वो life में इसलिए आगे निकल जाते है क्योकि उन्हें teacher के डांट दिए जाने पर भी डर नही लगता। वो छोटे मोटे डर से कई आगे निकल जाते है। Life को जीने के लिए सबसे important चीज ही तो courage है। मस्तीखोर बच्चे कभी teacher को satisfy या उन्हें please करने की कोशिश नही करते और life भी तभी खुल के जी जा सकती है जब आप हर इंसान को satisfy या please करना छोड़ दे। क्योकि आप कितना भी कर ले आप सबको खुश रख ही नही सकते। तो फिर ऐसी फालतू की कोशिशो पर अपना time waste किया ही क्यों जाये।

School के marks से जिंदगी नही चलती। जिंदगी के मायने और life का satisfaction में उतार चढ़ाव और ज़िन्दगी में emotional balance को maintain करना- Geography और maths के marks से कही ऊपर है?

Image Source

किशोरावस्था और यौवन की उत्सुकता

बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन

मार्क जकरबर्ग के अनमोल विचार

रॉबिन शर्मा के अनमोल विचार

You may also like

0 comments

Leave a Reply