कैसे रखे अपने दिल को स्वस्थ

Remedies for Healthy Heart in Hindi

हृदय शरीर का एक सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह न केवल शरीर के सब अंगों तक रक्त संचार करता है अपितु यह अशुद्ध रक्त का संचार करता है व रक्त शुद्ध कर उसके पुर्नसंचार का भी कार्य करता है। इस अंग की कोई भी समस्या बहुत सारे विकारों को जन्म दे सकती है जिनमें हार्ट अटैक व मृत्यु तक हो सम्मिलित है। यद्यपि ऐसी बहुत सी चीजें है जो कि आप अपने हृदय को स्वस्थ रखने के लिये कर सकते है यहाँ हम 6 ऐसे प्राकृतिक तरीके बता रहे हैं जो हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक है। Read Remedies for Healthy Heart in Hindi (Dil Ko Healthy Kaise Rakhe).

Apne Dil Ko Healthy Kaise Rakhe in hindi

Remedies for Healthy Heart in Hindi

(Dil Ko Healthy Kaise Rakhe)

1. लहसुन (Garlic for Heart Disease)

भारत का एक अद्भुत पौधा लहसुन में ऐसी अनेक-अनेक औषधीय खूबियाँ हैं जो इसे वास्तविकता में एक चमत्कारिक औषधि बनाती हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि लहसुन की एक कली का रोज सेवन शरीर में बुरे LDL कोलेस्ट्रोल का बनना कम करता है, अच्छे HDL कोलेस्ट्रोल का उत्पादन बढ़ाता है व साथ ही ब्लड प्रेशर को सामान्य रखता है। कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि जो लोग लहसुन का नियमित सेवन करते हैं उनका रक्त संचार बेहतर होता है व उनके शरीर में हानिकारक रक्त का जमाव कम होता है।

2. लाल मिर्च (Red Chili for Heart Disease)

लाल मिर्च का प्रयोग हम अधिकतर सब्जियों को मसालेदार बनाने के लिये करते है पर क्या आप जानते है कि यह हृदय के लिये भी लाभदायक है। लाल मिर्च में एक पदार्थ होता है – कैप्सेसिन जो रक्तवाहिनियों का लचीलापन बढ़ाता है जिससे वे स्वस्थ रहती हैं। अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह रक्त थक्कों के बनने के अवसर घटाती है व बुरे कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करती है। समग्रता में लाल मिर्च हमारी पूरी हृदय प्रणाली की कार्य पद्वति को सुधारती है व ब्लड प्रेशर को सामान्य सीमा में रखती है।

3. अदरक (Ginger for Heart Disease)

यद्यपि, अदरक को सबसे ज्यादा पाचन व वायु विरोधी गुणों के कारण जाना जाता है, अब यह हृदय के लिये स्वास्थवर्धक औषधि के रूप में तेजी से पहचान पा रही है। अध्ययन बताते हैं कि अदरक थक्कों के बनने से बचाव, रक्त संचार सुधारने व बुरे LDL कोलेस्ट्रोल को घटाने में सक्षम हैं। कुछ प्रायोगिक अध्ययनों में पाया है कि रक्त के थक्कों से बचाने में अदरक ’’एस्प्रिन’’ से भी अधिक कारगर है।

4. ग्रीन टी (Green Tea for Heart Disease)

ग्रीन टी उन कच्ची व ग्रीन टी की पत्तियों से बनाई जाती है जो थोडी कड़वी होती हैं। काली चाय के मुकाबले ग्रीन टी में ’’एपिगेलो कैटेचिन गैलेट’’ नामक प्रतिउपचायक (एन्टी ऑक्सीडेंट) अधिक पाया जाता है। यह प्रतिउपचायक उन कोशिकाओं का स्वास्थ बढाता है जो हमारी रक्त वाहिनियों व हृदय की सबसे अंदरूनी परत बनाते हैं। अध्ययन यह भी बताते है कि ग्रीन टी बुरे LDL कोलेस्ट्रोल का बनना कम करती है व ब्लड प्रेशर को बढने से बचाती है। ग्रीन टी के 3 से 4 कप प्रतिदिन पीने से हृदय व रक्त वाहिनियां स्वस्थ रहती हैं और यह हृदय रोगों के खतरे को कम करने में सहायक है।

5. अर्जुन छाल (Arjun Chal for Heart Disease)

अर्जुन वृक्ष की छाल में ऐसे कई महत्वपूर्ण रसायनिक घटक जैसे टैनिन, सैपोनिन व फ्लेवनॉइड पाए जाते है जिनमें हृदय की सुरक्षा के गुण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अर्जुन छाल को सबसे

असरकारक हृदय टॉनिक कहा जा सकता है।

अब अघ्ययनों में यह पाया गया है कि अर्जुन छाल के सत्व वही कार्य करते है जो हार्ट अटैक में नाइट्रोग्लिसरीन करता है इसके अलावा यह बुरे कोलेस्ट्रोल को कम करने, अच्छे कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने व ब्लड प्रेशर को कम करने में भी सहायक है।

सुझाव अर्जुन छाल का एक छोटा टुकडा लेकर उसे 8 घंटे के लिए पानी में भिगों दें और सुबह उसे उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े का नियमित सेवन ह्नदय के सुचारू कार्य करने में मदद करता है।

6. गुग्गुल (Guggal for Heart Disease)

प्राचीन समय में गुग्गुल का प्रयोग आयुर्वेद में इसके मोटापे व गठिया नाशक गुण व हृदय तंत्र सुधार के कारण होता है। अध्ययन बताते है कि गुग्गुल के वृक्ष की राल में ’’केटोनिक स्टेरॉयड’’ तत्व होते है जिन्हें ’’गुग्गुल स्टेरॉयड’’ कहा जाता है। और इनमें कोलेस्ट्रोल युक्त जमाव जो धमनियों की अंदरूनी सतह पर बनता है, उसे कम करने कि क्षमता है।

गुग्गुल हमारे शरीर की मेटाबोलिज्म दर को बढ़ाने के सहायक है, जो की वजन घटाने में सहायक होता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है। प्रायोगिक अध्ययन बताते हैं कि गुग्गुल बुरे कोलेस्ट्रोल को घटाने, अच्छे HDL कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने और प्लेटलेटस के संयोजन की प्रवृति को कम करता है।

ध्यान देने योग्य बात- (Points to Keep in Mind)

एक खास ध्यान रखने कि बात यह है कि लहसुन, लाल मिर्च, अदरक व हरी चाय जैसे उपचार हम हमारे नियमित खान पान में शामिल कर सकते हैं। पर जब ’अर्जुन छाल’ या ’गुग्गुल’ के प्रयोग की बात हो तो किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक का परामर्श लेना उचित है।

इन औषधियों को सम्मिश्रण (कॉम्बिनेशन) में पौष्टिक खान पान व उचित व्यायाम के साथ लेने व तनाव स्तर कम रखने से हम एक स्वस्थ्य हृदय सुनिश्चित करते हैं जो आने वाले कई सालों तक स्वस्थ्य व जीवन्त रहेगा।

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