Self-confidence बढाने के प्रैक्टिकल तरीके How To Improve Self Confidence In Hindi

How to Speak Confidently in Hindi


कुछ लोग तो बहुत confidence से बात कर लेते है पर कुछ लोग stage पर बोलने से ही बहुत डर जाते है घबरा जाते है। जिन लोगो को stage fear होता है ऐसा नही है कि वो बोल नही सकते। Friends से बात करते वक़्त तो बहुत मस्ती से बात कर लेते है, अगर किसी से लड़ाई भी करनी हो तो बहुत confidence से लड़ लेते है। बस stage पर बोलने पर उन्हें stage fear हो जाता है –  उन्हें basically ये डर सताता रहता है कि जब वो बोलेंगे तब लोग क्या कहेंगे और लोग क्या सोचेंगे? जब हम हमारे friends से बात कर रहे होते है तब तो बहुत confident होते है। जब हमे किसी पर गुस्सा आ रहा होता है तब भी हम बड़ा confidently बोल रहे होते है। इसका मतलब हमे बोलना तो आता है। हम बोल तो सकते है पर stage पर 500 या 1000 लोगों के बीच में नही बोल पाते। क्यों? क्योकि आपको बोलने के लिए एक ऐसा topic दे दिया जाता है, जिसमे आपका interest ही नही है। आपका interest है fashion में और आपको बात करनी होती है बात करनी होती है politics के बारे में। तो सबसे पहले confidence से बात करने के लिए आप इतना कष्ट करे कि ये पता लगाए की आपका बात करने का interest किसमे है। वो educational, relationship, gossip करना कुछ भी हो, बस आपका interest हो। कितने लोग ये कहते है कि ओह! मेरी तो आवाज ही अच्छी नही है। मैं presentation दूंगा तो अच्छा नही लगेगा। ये ध्यान रखिये कि आपकी आवाज एक instrument है और कोई भी instrument जैसे गिटार, तबला ये सब खराब नही होता। How To Improve Self Confidence In Hindi

How to Speak Confidently in Hindi

How to Speak Confidently in Hindi

(Confidence Se Kaise Baat Kare)

जिनकी आवाज इतनी अच्छी है जैसे Lata Mangashkar, Sonu Nigam, Asha Bhosle ये इतनी practice करते है, घण्टों रियाज करते है पर हम.. हम बिना practice किये ही बस ये रोना रोते रहते है कि हमारी आवाज अच्छी नही है। क्या आपने कभी Farhan Akhtar की आवाज को सुना है? अगर हाँ तो क्या वो आवाज एक hindi film में गाना गाने लायक एक typical आवाज है? नही! वो एक normal आवाज है। लेकिन उस voice में एक confidence है, इतना confidence कि लोग वो क्या कह रहे है इस पर ध्यान देते है ना कि वो किस आवाज में बात कर रहे है। बस आपकी बात में दम होना चाहिए… आपका एक तरीका होना चाहिए लोग तो Modi ji को भी सुनते है और लालु यादव को भी। आप जो बात कर रहे है उसमे आपका belief होना चाहिए, आपके तर्क में आपका confidence होना चाहिए। फिर क्या है – आपकी आवाज में आपका confidence अपने आप झलक जाएगा।

 

2 महीने, 4 महीना, 6 महीना हर एक घंटे अपने belief पर practice करे। उन बातों की script की practice करे जो आपको पसंद है। एक और technique है जो आपका confidence इतना easily बढ़ा सकती है कि आपको मालूम ही नही पड़ेगा। वो technique है गाना गाना- गुनगुनाना।  आपने देखा होगा कि जो लोग गुनगुनाते रहते है वो कितने मस्त होते है। भले ही माली हो homemaker हो, चपरासी हो या कोई बहुत बडा lawyer। गा तो कही भी सकते है। Shower लेते हुए गाइए खाना बनाते हुए गाइये, infact मैं कभी hospital में गई तो मेने देखा कि दो ladies जो blood test कराने आई थी वो भी गा रही थी.. किसी का गुनगुनाना कितना सुन्दर है। कितनी बार हम सबके घर में जो बाई काम करती है जो गुनगुना के, बिना किसी थकान के आराम से काम निपटा देती है और हम पढे लिखे MBA वाले corporate में job करने वाले लोग अपने आप को कितना कम आंकके सिर्फ एक second में ये कह देते है कि मैं presentation कैसे दूँ मेरी तो आवाज ही अच्छी नही है। गाना गाइए और practice कीजिये। It works ये पहला lesson था।

अब आई second lesson की बात। आप एक room में आते है जिसमे 15 -20 लोग है तो आप ये कैसे बता सकते है कि उस room में सबसे ज्यादा confident insaan कौन है? कौन सबसे emotionally strong है। कोई जानकार आपको इसका एक secret बताएगा। जो उस room में सबसे powerful है उसकी साँस उसकी breath हमेशा सबसे relaxed होगी।

 

हम हमारी रीढ़ की हड्ड़ी को control नही कर सकते पर हम हमारे unconscious को control कर सकते है। क्योकि हमारा unconscious हमारी breath हमारी साँस से control होता है। हमारी साँस हमारी relaxed confident power की एक चाबी है।

 

जो बड़े बड़े actors होते है उन्हें ये बात पता है। जब actors king play करते है, राजा बनते है तो वो बहुत ही still रहते है, शांत रहते है, ज्यादा हिलते भी नही। हर कोई राजा के आगे पीछे घूम रहा होता है। और राजा के उसी शांत और peaceful body language से हमे पता लगता है कि वो राजा है। जब कभी भी अगली बार आप nervous हो स्थिर रहने की कोशिश कीजिये, शांति अपने आप आ जाएगी और confidence, confidence शांति में है। वो इंसान ज्यादा confident होता है जिसे हर बार बोलने की जरूरत महसूस नही होती बजाए उस इंसान के जो अपने आपको कभी भी बोलने से रोक नही पता।

 

आपकी साँस को आप अपने diaphragm पर अंगूठा दबा कर भी control कर सकते है। आपका diaphragm आपके दोनों breast के नीचे center में होता है। इस जगह अपने अंगूठे से इस जगह को दबाये और साँस ले – आप पाएंगे की आपकी साँस बिना आपकी साँस के control किये जाने पर भी धीरे हो गई है। एक बार एक lady के साथ इतना बुरा हुआ कि किसी के साथ ना हो। Honeymoon पर ही उनके Husband की Heart Attack से death हो गई। ऐसा incident किसी को भी तोड़ के रख सकता है। ऐसे में बहुत guilt की feeling आती है – क्या मैंने कुछ गलत किया क्या मैंने खाने पीने का ध्यान नही रखा? जब बहुत महीने बीत जाने पर भी उनका दुःख कम नही हुआ तो उन्होंने इसी तरह अपने diaphragm पर अपना अंगूठा दबा के अपनी साँस को control किया। और बस कुछ ही दिनों में उनकी situation कितनी बार हमे अपने लिए नही पर दूसरे के लिए बोलने पर भी confidence चाहिए। आप कितना भी प्यार, गुस्सा क्यों न feel करते है अगर उसे express ही ना कर पाए तो इन feeling का क्या फायदा? क्या फायदा किसी को पसन्द करने का जब आप उसे बता ही ना पाय की आप उसे पसन्द करते है।

हमारी life हमारी साँस से चलती है। हमारे thought हमारी साँस की speed को control करते है। जब भी साँस अन्दर लेते है। आप अपने diaphragm पर अपना हाथ रखकर उस इंसान के बारे में सोचिये जिसे आप बहुत प्यार करते है। जब आप उसी साँस को बाहर निकालेंगे तो आप उस इंसान के लिए प्यार से भरे हुए होंगे। अब आप अगली साँस के साथ exited ही जाइये ये सोचकर की आने वाला time कितना excitement से भरा है और अब आप जब बोलेंगे तो आपकी आवाज excitement से भरी हुई होगी। आपकी आवाज को, आपके confidence को आप अपनी साँस से control कर सकते है। एक बहुत पुराना कथन है Inspiration & Respiration have the same root. प्रेरणा और साँस का एक ही स्त्रोत है- साँस अगर आपकी साँस- आपकी breathe आपके control में नही है तो आप बहुत बड़ा काम करना तो दूर बात भी नही कर पाएंगे।

हमारे ऋषि मुनि ये समझते थे की हम हमारे thoughts को हमारी साँस से अन्दर लेते है और जो भी हम बोलते है वो हमारी साँस के साथ ही बाहर आता है।

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