Pain

Alexander Technique for Back Pain in Hindi

आज कल पीठ का दर्द उन लोगों की आम समस्या बन गया है जो सारा दिन काम करते हैं। सिर्फ यही नहीं जो सारा दिन कुर्सी पर बैठ कर काम करते हैं वो भी पीठ के इस दर्द के शिकार हैं। पीठ के दर्द को दूर भगाने की कई विधियां जैसे spray एवं cream बाज़ार में उपलब्ध है, पर हर व्यक्ति पर इनका असर नहीं होता। इसलिए पीठ दर्द और अन्य कई बीमारियां जैसे तनाव, सांस लेने में तकलीफ और tennis elbow से निपटने के लिए काफी लोग Alexandra विधि का प्रयोग करते हैं। Read about Alexander Technique for Back Pain in Hindi (Kamar dard ke liye Alexander Technique).

यह विधि एक ऑस्ट्रेलियाई कलाकार Frederick Matthews Alexander नाम पर रखी गयी है। जिन्हें गले की और सांस लेने में समस्या होती थी। इससे निपटने के लिए उन्होंने इस विधि का इज़ाद किया जिसमें शरीर के संतुलन की तरफ ध्यान देकर स्वस्थ जीवन बिताने की इच्छा  ज़ाहिर की गयी है।

शरीर के विभिन्न भागों के असंतुलित (Imbalance) होने की वजह से हमें रोज़ाना के काम करने में तकलीफ होती है और हम शारीरिक रूप से कमज़ोर होते जाते हैं। यह एक स्वयंसेवी (volunteer) विधि है जो शरीर के खराब आसनों के बारे में बताती है और इनके कारण स्वास्थ्य पर होने वाली दुश्वारियों के बारे में भी बताती है। हमें यह तकनीक सकारात्मक रवैया रखने और संतुलित जीवन (balanced life) जीने की प्रेरणा देती है। इस तकनीक के अनुसार हम जितनी जल्दी अपनी गलतियों के बारे में समझते हैं, उतनी ही जल्दी ये गलतियां ख़त्म होती जाती हैं।

Alexander Technique for Back Pain in HindiAlexander Technique for Back Pain in Hindi

(Kamar dard ke liye Alexander Technique)

सिर को संतुलित रखना (Balanced Body)

सिर हमारे शरीर का सबसे ऊपरी भाग है और इसका वज़न करीब 5 kg तक होता है। सिर के सही तरह से संतुलित (balanced) होने से शरीर पर सकारात्मक असर पड़ता है और इसके असंतुलित (imbalance) होने की स्थिति में गले की मासपेशियो पर 5 kg का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इन मासपेशियो पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से सिर पीछे की तरफ ज़्यादा झुकता जाता है और सारे शरीर असंतुलित हो जाता है।

व्यायाम का महत्त्व (Importance of Exercise)

शरीर की मुद्रा को संतुलित (balance) करने के लिए कुछ व्यायामों का भी प्रयोग कर सकते है। आईने के सामने सीधे बैठें और देखते रहे कि सिर सीधी मुद्रा में है या नहीं। इसके अलावा भी पीठ दर्द और tennis elbow से निपटने के लिए और भी कुछ व्यायाम किये जा सकते हैं।

एलेक्सेंडर विधि के कुछ उदाहरण (Example of Alexander)

गर्दन की मांसपेशियों को धीरे धीरे छोड़ें और ठुड्डी को छाती (chest) तक लेकर जाएं। मांसपेशियों पर ज़्यादा ज़ोर ना देते हुए अब सिर को ऊपर की तरफ उठाएं और ऐसा तब तक करें जब तक आप खुद को आईने में सीधा देखते हुए ना भांप लें।

एक और तकनीक drummers के लिए है, जो की Newton के तीसरी विधि से प्रेरित है। इस तकनीक (technique) का उद्देश्य शरीर और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के बीच सम्बन्ध स्थापित करना है।

स्वयंसेवी कार्यक्रम (Volunteer Program)

आप एक Alexander तकनीक पर आधारित स्वयंसेवी कार्यक्रम (Volunteer Program) का हिस्सा बन सकते हैं, जो शरीर की बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है। ये सारी बीमारियां शरीर के असंतुलित होने की वजह से होती हैं और इस तकनीक की मदद से आप अपने शरीर को संतुलित (balanced) अवस्था में पहुंचा सकते हैं।

सही तरह बैठने की विधि (Right Sitting Position)

किसी व्यक्ति के बैठने के अंदाज़ पर उसका पीठ दर्द और Tendinitis जैसी बीमारियों से दूर रहना निर्भर करता है। हमारे शरीर में बैठने वाली हड्डियां दो गोलाकार हड्डियां होती हैं, जो कि हमारे शरीर के पृष्ठ भाग की मांसपेशियों में होती हैं। इन दोनों हड्डियों के बिना हम ठीक से बैठ नहीं सकते। अगर आप इन हड्डियों को महसूस करना चाहते हैं तो हाथ के बल बैठने की कोशिश करें। Alexander तकनीक Newton की तीसरी विधि पर आधारित है। अपनी रीढ़ को स्थिर रखें जिससे कि बाकी शरीर का संतुलन (balance) बना रहे।

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Causes Of Chest Pain In Hindi

सीने में दर्द की बात सुनते ही सबका ध्यान पहले ही दिल का दौरा पड़ने पर चला जाता है। मगर सीने में दर्द के कई और कारण भी हो सकते है। लंग्ज़, मसल्स, पसली या नसों में कोई समस्या होने पर सीने में दर्द होता है। किसी-किसी स्थिति में यह दर्द भयानक रूप धारण कर लेता है जो जानलेवा भी हो सकता है। लेकिन एक बात ध्यान में रखे की खुद ही रोग की पहचान ना करे और सीने में दर्द होने पर सबसे पहले डॉक्टर से चेक उप कराए। आइए जानते है सीने में दर्द का कारण बनने वाले कुछ रोगो के बारे में। Read Causes of chest pain in hindi (Seene Mein Dard ke Karan).

 Seene Mein Dard ke Karan

Causes Of Chest Pain In Hindi

सीने में दर्द के कारण (Seene Mein Dard ke Karan)

 

1. हाई ब्लड प्रेशर होने पर (Chest Pain Due to High Blood Pressure)

जो नसे खून को लंग्ज़ तक ले जाती है जब उनका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है तब सीने में दर्द होता है और इस स्थिति को Pulmonary Hypertension कहते है।

2. फेफड़ो में रोग (Chest Pain Due to Lungs Disorder)

जब ब्लड वेसल्स में थक्का जमने लगता है तब लंग्ज़ के टिश्यूस में ब्लड सर्क्युलेशन रुकने लगता है। ऐसा होने से बेचैनी होने लगती है और सांस लेने में प्राब्लम होती है। बाद में यह सीने में दर्द का रूप ले लेती है।

3. एनजाइना होने पर (Chest pain Due to Angina)

जब हार्ट मसल्स को ऑक्सिजन कम मिलती है तब सीने में दर्द, बेचैनी और तनाव होने लगता है। इस बीमारी को एनजाइना कहते है। यह दर्द कंधे, पीठ और पेट के उपरी भाग में भी हो सकता है। यदि इस स्थिति को समय रहते ना संभाला जाए तो यह जानलेवा भी हो सकती है।

एनजाइना होने के कारण – डायबिटीज, हाई कोलेस्टरॉल और हार्ट के कमजोर होने के कारण यह बीमारी हो सकती है। महिलाओ में इर्रेग्युलर पीरियड्स की वजह से भी यह बीमारी हो सकती है।

4. डर या सदमा लगने के कारण (Chest Pain Due to Fear or Shock)

कभी-कभी सीने में दर्द अत्यधिक फियर, अचानक कोई सदमा लगने पर और heart rate बढ़ने के कारण भी हो सकता है।

5. तनाव के कारण (Chest Pain Due to Stress)

तनाव के कारण heart rate तेज हो जाती है और सांस लेने में प्राब्लम होने लगती है। इसके कारण ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है और हार्ट के ब्लड सर्क्युलेशन में रुकावट आने लगती है। इससे सीने में दर्द होने लगता है।

6. एसिडिटी होने पर (Chest Pain Due to Acidity)

एसिडिटी होने पर भी सीने में दर्द हो सकता है।

यह सब बीमारिया आपके अस्वास्थ खाना खाने के कारण होती है। इनसे बचने के लिए आपको नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। जो व्यायाम आपके शरीर के उपयुक्त हो उस व्यायाम को ज़रूर करे, जैसे – तेज कदमो से चलना, सीडिया चाड़ना, बॅडमिंटन खेलना आदि। साथ ही अपने आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाए और कैलोरीज की मात्रा कम करे। खाने में नमक की मात्रा को कम करना सबसे ज़रूरी होता है। इसके साथ ही स्मोकिंग और शराब पीने की आदत से बचे।

खुद को हेल्थी रखने के लिए व्यायाम करना और संतुलित आहार लेना ज़रूरी होता है। इन सबके अलावा खुद को खुश रखे और स्ट्रेस से दूर रहने की कोशिश करे।

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How To Get Rid Of Body Stiffness In Hindi

बहुत बार हम अनुभव करते हैं कि हमारी मांसपेशियों में जकड़न आ गई है और शरीर को हिलाएं-डुलाएं तो हमारी मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है। बदन दर्द (बॉडी पाईं) की प्राब्लम को नॉर्मली लोग इग्नोर ही कर देते है क्योंकि इसको सभी नॉर्मल बीमारी मानते है।आइए जानते है बदन की अकड़न के कुछ सामान्य कारण। Read How to Get Rid of Body Stiffness in Hindi (Shareer ki Akdan ko Kaise Door Kare).

Shareer ki Akdan ko Kaise Door Kare

How To Get Rid Of Body Stiffness In Hindi

बदन की अकड़न के कुछ कारण (Causes of Body Stiffness)

1. अधिक व्यायाम (Body Pain Due to Excessive Exercise)

क्षमता से अधिक व्यायाम करने से मांसपेशियां दर्द करने लगती हैं। इससे बचने के लिए व्यायाम शुरू करने से पूर्व हल्की वार्मअप एक्सरसाइज़ करनी चाहिए और व्यायाम समाप्त कर लेने के बाद हल्की एक्सरसाइज़ करनी चाहिए। व्यायाम तीव्र गति से नहीं करनी चाहिए। नियमित व्यायाम से दर्द और जकड़न दूर हो जाएगी।

2. ठंडा मौसम (Body Pain Due to Cold Weather)

कई बार ठंडे मौसम से भी मांसपेशियों में दर्द और खिंचाव होता है। ऐसे में मांसपेशियों की हल्की मालिश, मांसपेशियों में खिंचाव वाली हलकी एक्सरसाइज़ और गर्म कपड़े पहनना शरीर को आराम देता है।

3. खिंचाव (Body Pain Due to Stretch)

कई बार शरीर की किसी एक मांसपेशी में खिंचाव हो जाता है और जिससे काफी दर्द होने लगता है। अधिकतर यह हमारे पैर या टांग की मांसपेशियों में होती है। इसके लिए ठंडे वातावरण से दूर रहें, पौष्टिक भोजन और उचित मात्रा में पानी पिए। भारी व्यायाम न करें। मल्टी विटामिन व खनिज और फिश ऑयल का सेवन करे।

4. गलत शारीरिक स्थिति (Body Pain Due to Wrong Body Posture)

कई बार उठने बैठने के गलत ढंग से भी मांसपेशियों में दर्द होने लगता है। ऐसे में यौग बहुत लाभप्रद होता हैं। स्ट्रेचिंग और शवासन करके भी लाभ उठा सकता है।

बदन की अकड़न को दूर करने के उपाए (Shareer ki Akdan ko Kaise Door Kare)

आइए जानते है बदन की अकड़न को दूर करने के कुछ उपाए।

  1. अखरोठ के तेल की मालिश से पैरों की अकड़न कम हो जाती है।
  2. अडूसे के फलों और फूल को तेल में पकाकर छान लें। इस तेल से पैरों की मालिश करे अकड़न कम हो जाएगी है।
  3. अकड़न दूर करने के लिए गर्म सरसों के तेल की मालिश करे।
  4. अकड़ दूर करने के लिए गर्म पानी का सेक आराम पहुचाएगा। बोतल में गरम पानी दाल कर सेक करे।
  5. अकड़न की समस्या से तुरंत आराम पाने के लिए अजवायन और लहसुन को सरसों के तेल में डाल कर गर्म करें फिर इससे मसाज करे।
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Back Pain In Pregnancy in Hindi

कमर दर्द ( Back Pain ), गर्भावस्था ( Pregnancy ) में आमतौर पर होने वाली परेशानियों में से एक है। गर्भावस्था ( Pregnancy ) के समय कमर दर्द ( Back Pain ) अनेक कारणों से हो सकता है। Read About Back Pain In Pregnancy in Hindi (Pregnancy Mein Back Pain). 

Pregnancy Mein Back Pain

Back Pain In Pregnancy in Hindi

(Pregnancy Mein Back Pain)

  • गर्भावस्था ( Pregnancy ) में गर्भाशय भारी होने लगता है, महिलाओं के गुरूत्वाकर्षण का केन्द्र बदलने लगता है जिससे हाव-भाव और गतिविधियों में परिवर्तन होता है।
  • ज्यादातर महिलाएं गर्भावस्था ( Pregnancy ) के अंतिम चरण में पीछे की ओर झुक जाती है जिससे कमर की मांसपेशियों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और कमर दर्द ( Back Pain ) की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • पेट की मांसपेशियों का कमजोर होना भी गर्भावस्था ( Pregnancy ) के दौरान कमर दर्द ( Back Pain ) का कारण हो सकता है। सामान्यत: पेट की मांसपेशियां रीढ़ की हड्डी को सहारा देकर कमर के स्वास्थ्य को सही रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • इसके अतिरिक्त गर्भावस्था ( Pregnancy ) हार्मोन मांसपेशियों को मुक्त कर ढ़ीला कर देते है जिससे कमर दर्द ( Back Pain ) हो सकता है और शारीरिक गतिविधियों के दौरान चोट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है।
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Back Pain Causes in Hindi

ऐसा माना जाता है क्रियेटिन ऐथलेटिक पर्फारमेंस को बढ़ता है और मसल्स को बनाने में भी मदद करता है। अगर आप लम्बे समय तक स्वस्थ्य रहना चाहते हैं तो आपको प्रोटीन सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करने से पहले उनके प्रभाव को जान लेना चाहिए। Read Back Pain Causes in Hindi (Back Pain Ke Karan).

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Back Pain Causes in Hindi

(Back Pain Ke Karan)

मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव (Muscle Cramps And Stretch):

  • मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव कमर दर्द का सबसे आम कारण माना जाता है।
  • कमर की अजीब हलचल (खांसने, छींकने, जूतों की लेस बांधने के लिए झुकना या भारी वस्तु को गलत तरीके से उठाने आदि) मांसपेशियों में ऐंठन का कारण हो सकती है।
  • ऐंठन से कमर जकड़ सकती है और तेज दर्द का कारण बनती है।
  • मांसपेशियों में ऐंठन समय के साथ ठीक होती जाती है।
  • मांसपेशियों, पुट्ठों, या स्नायुबंध में खिंचाव या जोड़ों में सुजन रीढ़ की हड्डी में दर्द का कारण हो सकता है।
  • यदि कमर में खिंचाव हो तो दर्द या खिसकाव समय के साथ बढ़ सकता है या तत्काल दर्द महसूस हो सकता है।

अधिक वजन (Overweight):

  • ज्यादा वजन रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ाता है।
  • इसके साथ ही पेट के आसपास बढ़ी हुई फैट संतुलन बिगाड़ती है और खतरा बढ़ा सकती है।
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Body Posture To Avoid Back Pain In Hindi

सही मुद्रा में बैठने, खड़े होने, सोने, सामान उठाने से भी कमर स्वस्थ रहती है। मुद्रा तकनीक भी कमर दर्द दूर करने में सहायक हो सकती है।आइये जानते है हमें कैसे सही मुद्रा अपनानी चाहिए जिससे हमें कमर में दर्द की तकलीफ न हो। Read about right body posture to avoid back pain in hindi (Peeth Dard Se Bachne ke Liye Sahi Mudrae).

Peeth Dard Se Bachne ke Liye Sahi Mudrae

Body Posture To Avoid Back Pain In Hindi

(Peeth Dard Se Bachne ke Liye Sahi Mudrae)

बैठते समय(While Sitting):

  • बैठने के तरीके का ध्यान रखें। कुर्सी पर भुजाओं को आराम से टिका कर बैठे। कमर को सीधा रखे और कंधों को ढीला रखें।
  • यदि यह ज्यादा आरामदायक हो तो कुर्सी को 13-20 डिग्री के कोण पर रखे। कमर के प्राकृतिक घुमाव को बनाये रखने के लिए छोटा तकीया कमर के निचले भाग पर रख सकते है।
  • घुटनों को कुल्हों से हल्का ऊपर रखें। यदि आवश्यक हो तो पाँवों के नीचे फुटस्टूल का प्रयोग करें।
  • पाँवों को फर्श, स्टूल पर सीधा रखें।
  • लम्बे समय तक नहीं बैठे रहें और मांसपेशियों को खिंचाव के लिए बीच-बीच में उठते रहें और उनको आराम प्राप्त करने का मौका देवें।

 

जब खड़े रहें(While Standing):

  • दोनों पाँवों पर बराबर वजन डालकर खड़े रहें।
  • अपने घुटनों की लॉकिंग से बचें।
  • कमर के स्ट्रेस को कम करने के लिए एक पैर फुटस्टूल पर रखें।
  • यदि आपको लम्बे समय तक खड़ा रहना पड़ता है तो फ्लैट या कम हील वाले जूते पहनें।
  • अपने पेट और नितंबों की मांसपेशियों को मजबूत करके कमर को सीधा रखें।

 

सोते समय(At Bedtime):

  • फर्म गद्दे का उपयोग करें।
  • घुटने मोड़कर करवट लेकर सोयें।
  • यदि आप कमर के बल सोते है तो घुटनों के बीच तकिया रखना आरामदायक होता है।

 

वजन उठाते समय(When Lifting Weights):

  • हमेशा अपने पाँवों के बल उठाये।
  • कमर को सीधा रखे और घुटने मोड़ते हुए नीचे झुके, कमर को मुड़ने से बचाएं।
  • सामान को अपने शरीर के करीब से पकड़े रहें।
  • वस्तुओं को उठाने के लिए अंगों को मजबूत बनायें।
  • हमेशा ज्यादा भारी सामान के लिए मदद ले लेवें।
  • हमेशा वजन ले जाते समय अपनी कमर को मुड़ने से बचायें।

 

जूतें(Shoes):

  • जूते आपकी मुद्रा को प्रभावित करते है।
  • कम या फ्लैट हील वाले जूते पहने क्योंकि ऊंची हील आपकी मुद्रा में परिवर्तन कर आपकी कमर पर ज्यादा दबाव डाल सकती है।
  • रीढ़ की हड्डी को झटकों से बचाने के लिए गद्देदार तले वाले जूते चुनें।
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Treatment for Back Pain in Hindi

कमर में होने वाला वह दर्द है, जो आम तौर पर मांसपेशियों, तंत्रिका, हड्डियों, जोड़ों या रीढ़ की अन्य संरचनाओं में महसूस किया जाता है। कमर को स्वस्थ रखने के लिए किसी को भी इन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। Read Treatment for Back Pain in Hindi (Kamar Dard ka Ilaj)

Closeup of young woman suffering from back pain; Shutterstock ID 81292780; PO: The Huffington Post; Job: The Huffington Post; Client: The Huffington Post; Other: The Huffington Post

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Treatment for Back Pain in Hindi

(Kamar Dard Ka Ilaj)

एक्सरसाइस(Exercise):

  • कमर की समस्याओं के लिए नियमित एक्सरसाइस सबसे शक्तिशाली हथियार है।
  • कमर दर्द में योगासन से आप कमर दर्द के दौरान ना सिर्फ दर्द से निजात पा सकते हैं बल्कि कमर दर्द की समस्या से भी बच सकते हैं।
  • फैट कम करने के लिए योगासन कर सकते है जो आपका वजन कम करने और आपको स्वस्थ एवं तंदूरस्त रखने में सहायक है।
  • कमर की मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन बढ़ने से वजन सही तरीके से बंट जाता है और रीढ़ की हड्डी पर कम दबाव पड़ता है।
  • कमर की मांसपेशियों को मजबूत बनाना भी कमर दर्द का उपचार करने का ही एक कदम है।

आहार(Diet):

  • पहली नजर में, आहार कमर को स्वस्थ रखने के लिए एक अजीब कारक लग सकता है लेकिन हमेशा वजन नियंत्रण करने के लिए संतुलित आहार चार्ट बनाये रखने की सलाह दी जाती है जो कमर को स्वस्थ बनाये रखने में महत्त्वपूर्ण है।
  • ज्यादा वजन कमर पर दबाव बढ़ाता है और संतुलन बिगाड़ देता है।
  • वजन घटाने और नियंत्रित करने का सबसे बढि़या तरीका हैः
  1. संतुलित आहार का सेवन
  2. नियमित एक्सरसाइस
  • याद रखे कि फैट युक्त आहार और जल्दी वजन घटाने के कामक्रमों से दुर रहें।

चिकित्सकीय सलाह(Medical advice):

  • अगर आवश्यक हो तो कोई भी व्यक्तिगत अभ्यास/एक्सरसाइस और घर पर देखभाल की योजना या संशोधित काम योजना बनायें।
  • सर्जिकल प्रबंधनः- कमर दर्द के कारण के आधार पर सर्जिकल उपचार की योजना बनाई जा सकती है।

फिजियोथैरेपी से(From Physiotherapy):

  • तेज कमर दर्द दुर करने के उपाय जैसे इंटरफेरेन्सियल थैरेपी, अल्ट्रासाउण्ड या शॉर्ट वेव डाइथर्मी आदि की जा सकती है। कमर दर्द के कारण के आधार पर पेल्विक ट्रैक्शन (रूक रूक कर या लगातार) दिया जा सकता है।
  • रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियों को मजबुत बनाने के साथ-साथ सही मुद्रा जैसे फर्श से कोई वस्तु उठाते समय कुल्हे और घुटने खोल कर आगे नहीं झुकना चाहिए आदि के बारे में भी बताया जाता है।
  • मरीजों को काम करते समय बैठने, खड़े रहने या वजन उठाते समय सही मुद्रा बनाये रखने की सलाह दी जाती है।

Home Remedies for Back Pain in Hindi

अनियमित दिनचर्या ने लोगों को कई बीमारियां दी हैं, इनमें से एक है- पीठ दर्द। उठने-बैठने की सही मुद्रा का ध्यान न रखने और व्यायाम की कमी की वजह से गर्दन, पीठ और कमर दर्द की समस्याएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। मानव शरीर की संरचना में पीठ पर शरीर का अधिकतम भार रहता है, इस कारण उसमें दर्द होना सामान्‍य: बात है। हड्डी में किसी प्रकार की दिक्‍कत होना या नस का खिंचना आदि दर्द का कारण होता है। पीठ दर्द के कई अन्‍य कारण होते है जैसे – सही से बैठना, ज्‍यादा देर तक बैठे रहना, बिस्‍तर सही न होना, गलत तरीके से सो जाना आदि। हम सभी को कभी न कभी पीठ में दर्द जरूर परेशान करता है।  ऐसे में डॉक्‍टर को दिखाना जरूरी होता है।  आइए जानते है घर बैठे हम कैसे कर सकते है पीठ दर्द का उपचार। Read Home Remedies for Back Pain in Hindi (Peeth Dard ka Gharelu Upchar).

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Home Remedies for Back Pain in Hindi

(Peeth Dard ka Gharelu Upchar)

1. ठण्डा या गर्म पैक लगाएं।

2. आरामदायक स्थिति में रहें।

3. कुछ समय आराम करें।

4. हल्का व्यायाम करें।

5. काउंटर पैन रिलीवर का प्रयोग करें।

6. जल्‍दी सोएं और पूरी नींद लें

7. धुम्रपान न करें

8. पीठ पर मसाज लें

ये पीठ दर्द के उपचार है। पीठ में दर्द की वजह हो सकती है, लेकिन अधिक वजन को इसका प्रमुख कारण माना जाता है। गलत मुद्रा के कारण मांसपेशियों में खिंचाव, मोच व लचक आना, हड्डियों और डिस्क में विकृति आना भी इसका कारण है। रीढ़ की डिस्क क्षतिग्रस्त होने से यह दिक्‍कत और बढ़ जाती है। अधिक समस्‍या होने पर चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए। यह सामान्य जानकारी आपके पीठ के दर्द को कैसे स्वस्थ रखें उसमें भी सहायक है। पीठ की चोट दर्दनाक चोट में से एक है। यदि आपको तेज दर्द हो तो स्वयं उपचार करने की बजाए सामान्य चिकित्सक से परामर्श लेवें। आप पीठ दर्द के लिए एक्यूप्रैशर उपचार भी ले सकते है क्योंकि एक्यूप्रैशर बिंदुओं के अनेक लाभ है।

Prevention From Back Pain in Hindi

पीठ दर्द से निपटने की पहली रणनीति इसकी रोकथाम की कोशिश करना है। पीठ को स्वस्थ रखने के लिए किसी को भी इन तीन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। Read Prevention From Back Pain in Hindi (Peeth ke Dard se Kaise Bache).

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  1. व्यायाम
  2. मुद्रा
  3. आहार

Prevention From Back Pain in Hindi

(Peeth ke Dard se Kaise Bache)

1. व्यायाम (Exercise to Avoid Back Pain)

पीठ की समस्याओं के लिए नियमित व्यायाम सबसे शक्तिशाली हथियार है। व्यायाम में पीठ को मजबुत करने, एरोबिक क्षमता बढ़ाने, संपूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ाने, तनाव कम करने का सामथ्र्य है और यह अतिरिक्त वजन जो पीठ पर ज्यादा दबाव डालता है को सही आकार में लाने में सहायक है।

आप फैट को कम करने के लिए योगासन कर सकते है जो आपका वजन कम करने और आपको स्वस्थ एवं तंदूरस्त रखने में सहायक है। पीठ की मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन बढ़ने से वजन सही तरीके से बंट जाता है और रीढ़ की हड्डी पर कम दबाव पड़ता है। पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाना भी पीठ दर्द का उपचार करने का ही एक कदम है।

2. मुद्रा (Posture for Back Pain)

सही मुद्रा में रहने से भी पीठ स्वस्थ रहती है। मुद्रा तकनीक भी पीठ दर्द दूर करने में सहायक हो सकती है।

    बैठते समय (Sitting Posture)

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  • अपने बैठने के तरीके का ध्यान रखें। फर्म कुर्सी पर भुजाओं को आराम से टिका कर बैठे। पीठ को सीधा रखे और कंधों को ढीला रखें।
  • यदि यह ज्यादा आरामदायक हो तो कुर्सी के पिछले भाग को 13-20 डिग्री के कोण पर रखे। पीठ के प्राकृतिक घुमाव को बनाये रखने के लिए छोटा तकीया पीठ के निचले भाग के पीछे रख सकते है।
  • घुटनों को कुल्हों से हल्का ऊपर रखें। यदि आवश्यक हो तो पैरों के नीचे फुटस्टूल का प्रयोग करें।
  • अपने पैरों को फर्श, स्टूल पर सीधा रखें।
  • लम्बे समय तक बैठे नहीं रहें और तंग मांसपेशियों को खिंचने के लिए बीच-बीच में उठते रहें और उनको आराम प्राप्त करने का मौका देवें।

    जब खड़े रहें (Standing Posture)

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  • दोनों पैरों पर बराबर वजन डालकर खड़े रहें।
  • अपने घुटनों की लॉकिंग से बचें।
  • पीठ के तनाव को कम करने के लिए एक पैर फुटस्टूल पर रखें।
  • यदि आपको लम्बे समय तक खड़ा रहना पड़ता है तो फ्लैट या कम हील वाले जूते पहनें।
  • अपने पेट और नितंबों की मांसपेशियों को मजबूत करके पीठ को सीधा रखें।

    सोते समय (Sleeping Posture)

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  • फर्म गद्दे का उपयोग करें।
  • घुटने मोड़कर करवट लेकर सोयें।
  • यदि आप पीठ के बल सोते है तो घुटनों के बीच तकिया रखना आरामदायक होता है।

    वजन उठाते समय (Weight Lifting Posture)

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  • हमेशा अपने पैरों के बल उठाये।
  • पीठ को सीधा रखे और घुटने मोड़ते हुए नीचे झुके, पीठ को मुड़ने से बचाएं।
  • सामान को अपने शरीर के करीब से पकड़े रहें।
  • वस्तुओं को उठाने के लिए अंगों को मजबूत बनायें।
  • हमेशा ज्यादा भारी सामान के लिए मदद ले लेवें।
  • हमेशा वजन ले जाते समय अपनी पीठ को मुड़ने से बचायें।

3. जूतें (Shoes to Avoid Back Pain)

  • जूते आपकी मुद्रा को प्रभावित करते है।
  • कम या फ्लैट हील वाले जूते पहने क्योंकि ऊंची हील आपकी मुद्रा में परिवर्तन कर आपकी पीठ पर ज्यादा दबाव डाल सकती है।
  • रीढ़ की हड्डी को झटकों से बचाने के लिए गद्देदार तले वाले जूते चुनें।

4. आहार (Food to Avoid Back Pain)

पहली नजर में, आहार पीठ को स्वस्थ रखने के लिए एक अजीब कारक लग सकता है लेकिन हमेशा वजन नियंत्रण करने के लिए संतुलित आहार चार्ट बनाये रखने की सलाह दी जाती है जो पीठ को स्वस्थ बनाये रखने में महत्त्वपूर्ण है। ज्यादा वजन पीठ पर दबाव बढ़ाता है और संतुलन बिगाड़ देता है।

वजन घटाने और नियंत्रित करने का सबसे बढि़या तरीका हैः

  1. संतुलित आहार का सेवन
  2. नियमित व्यायाम

याद रखे कि फैट युक्त आहार और जल्दी वजन घटाने के कार्यक्रमों से दुर रहें।

5. चिकित्सकीय सलाह (Medical Advice for Back Pain)

  1. अगर आवश्यक हो तो कोई भी व्यक्तिगत अभ्यास/व्यायाम और घर पर देखभाल की योजना या संशोधित कार्य योजना बनायें।
  2. सर्जिकल प्रबंधनः- पीठ दर्द के कारण के आधार पर सर्जिकल उपचार की योजना बनाई जा सकती है।

6. फिजियोथैरेपी (Physiotherapy for Back Pain)

  1. तेज पीठ दर्द दुर करने के उपाय जैसे इंटरफेरेन्सियल थैरेपी, अल्ट्रासाउण्ड या शॉर्ट वेव डाइथर्मी आदि की जा सकती है। पीठ दर्द के कारण के आधार पर पेल्विक ट्रैक्शन (रूक रूक कर या लगातार) दिया जा सकता है।
  2. रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियों को मजबुत बनाने के साथ-साथ सही मुद्रा जैसे फर्श से कोई वस्तु उठाते समय कुल्हे और घुटने खोल कर आगे नहीं झुकना चाहिए आदि के बारे में भी बताया जाता है।
  3. मरीजों को कार्य करते समय बैठने, खड़े रहने या वजन उठाते समय सही मुद्रा बनाये रखने की सलाह दी जाती है।

Causes of Back Pain in Hindi

कोई भी चीज जो पीठ की मांसपेशियों या तंत्रिकाओं पर दबाव डालती है दर्द का कारण हो सकती है और रीढ़ की हड्डी में कोई समस्या या इसका क्षतिग्रस्त होना भी दर्द का कारण हो सकता है। हालांकि पीठ दर्द पश्चिमी देशों में सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इसका कारण अक्सर पता नहीं चलता है। फिर भी बहुत सी तेज पीठ दर्द की समस्याएँ हल्की मोच, खिंचाव, ऐंठन और पीठ का बहुत अधिक प्रयोग हो सकती है। Read Causes of Back Pain in Hindi (Kamar Dard Ke Karan).

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Causes of Back Pain in Hindi

(Kamar Dard Ke Karan)

1. मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव (Muscles Cramps)

मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव पीठ दर्द का सबसे आम कारण माना जाता है। पीठ की अजीब हलचल (खांसने, छींकने, जूतों की लेस बांधने के लिए झुकना या भारी वस्तु को गलत तरीके से उठाने आदि) मांसपेशियों में ऐंठन का कारण हो सकती है। ऐंठन से पीठ जकड़ सकती है और तेज दर्द का कारण बनती है।

मांसपेशियों में ऐंठन समय के साथ ठीक होती जाती है। मांसपेशियों, पुट्ठों, या स्नायुबंध में खिंचाव या जोड़ों में सुजन रीढ़ की हड्डी में दर्द का कारण हो सकता है। यदि पीठ में खिंचाव हो तो दर्द या खिसकाव समय के साथ बढ़ सकता है या तत्काल दर्द महसूस हो सकता है।

2. अधिक वजन (Back Pain Due to Heavy Weight)

ज्यादा वजन रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ाता है। इसके साथ ही पेट के आसपास बढ़ी हुई फैट संतुलन बिगाड़ती है और खतरा बढ़ा सकती है।

3. गर्भावस्था (Back Pain Due to Pregnancy)

पीठ दर्द, गर्भावस्था के समय आमतौर पर होने वाली परेशानियों में से एक है। गर्भावस्था के समय पीठ दर्द अनेक कारणों से हो सकता है:

  1. गर्भावस्था के मध्य में गर्भाशय भारी होने लगता है, महिलाओं के गुरूत्वाकर्षण का केन्द्र बदलने लगता है जिसका परिणाम हाव-भाव और गतिविधियों में परिवर्तन है। ज्यादातर महिलाएं गर्भावस्था के अंतिम चरण में पीछे की ओर झुक जाती है जिससे पीठ की मांसपेशियों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  2. पेट की मांसपेशियों का कमजोर होना भी गर्भावस्था के दौरान पीठ दर्द का कारण हो सकता है। सामान्तया पेट की मांसपेशियां रीढ़ की हड्डी को सहारा देकर पीठ के स्वास्थ्य को सही रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  3. इसके अतिरिक्त गर्भावस्था हार्मोन मांसपेशियों को मुक्त कर ढ़ीला कर देते है जिससे पीठ दर्द हो सकता है और शारीरिक गतिविधियों के दौरान चोट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है।

4. गलत मुद्रा (Back Pain Due to Wrong Posture)

किसी भी परिस्थिति में गलत मुद्रा चाहे ज्यादा देर खड़े रहने, बैठने, व्यायाम या वजन उठाते समय या किसी अन्य गतिविधि के दौरान गलत मुद्रा पीठ दर्द और समस्याओं का कारण बन सकती है।

5. जीवनशैली (Back Pain Due to Bad Lifestyle)

जीवनशैली के कारण जैसे तनाव और धूम्रपान के कारण कुछ मामलों में पीठ दर्द हो सकता है। हालांकि इसका संबंध अभी तक प्रमाणित नहीं हुआ है।

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