Psychology

How to Speak Confidently in Hindi

कुछ लोग तो बहुत confidence से बात कर लेते है पर कुछ लोग stage पर बोलने से ही बहुत डर जाते है घबरा जाते है। जिन लोगो को stage fear होता है ऐसा नही है कि वो बोल नही सकते। Friends से बात करते वक़्त तो बहुत मस्ती से बात कर लेते है, अगर किसी से लड़ाई भी करनी हो तो बहुत confidence से लड़ लेते है। बस stage पर बोलने पर उन्हें stage fear हो जाता है –  उन्हें basically ये डर सताता रहता है कि जब वो बोलेंगे तब लोग क्या कहेंगे और लोग क्या सोचेंगे? जब हम हमारे friends से बात कर रहे होते है तब तो बहुत confident होते है। जब हमे किसी पर गुस्सा आ रहा होता है तब भी हम बड़ा confidently बोल रहे होते है। इसका मतलब हमे बोलना तो आता है। हम बोल तो सकते है पर stage पर 500 या 1000 लोगों के बीच में नही बोल पाते। क्यों? क्योकि आपको बोलने के लिए एक ऐसा topic दे दिया जाता है, जिसमे आपका interest ही नही है। आपका interest है fashion में और आपको बात करनी होती है बात करनी होती है politics के बारे में। तो सबसे पहले confidence से बात करने के लिए आप इतना कष्ट करे कि ये पता लगाए की आपका बात करने का interest किसमे है। वो educational, relationship, gossip करना कुछ भी हो, बस आपका interest हो। कितने लोग ये कहते है कि ओह! मेरी तो आवाज ही अच्छी नही है। मैं presentation दूंगा तो अच्छा नही लगेगा। ये ध्यान रखिये कि आपकी आवाज एक instrument है और कोई भी instrument जैसे गिटार, तबला ये सब खराब नही होता। How To Improve Self Confidence In Hindi

How to Speak Confidently in Hindi

How to Speak Confidently in Hindi

(Confidence Se Kaise Baat Kare)

जिनकी आवाज इतनी अच्छी है जैसे Lata Mangashkar, Sonu Nigam, Asha Bhosle ये इतनी practice करते है, घण्टों रियाज करते है पर हम.. हम बिना practice किये ही बस ये रोना रोते रहते है कि हमारी आवाज अच्छी नही है। क्या आपने कभी Farhan Akhtar की आवाज को सुना है? अगर हाँ तो क्या वो आवाज एक hindi film में गाना गाने लायक एक typical आवाज है? नही! वो एक normal आवाज है। लेकिन उस voice में एक confidence है, इतना confidence कि लोग वो क्या कह रहे है इस पर ध्यान देते है ना कि वो किस आवाज में बात कर रहे है। बस आपकी बात में दम होना चाहिए… आपका एक तरीका होना चाहिए लोग तो Modi ji को भी सुनते है और लालु यादव को भी। आप जो बात कर रहे है उसमे आपका belief होना चाहिए, आपके तर्क में आपका confidence होना चाहिए। फिर क्या है – आपकी आवाज में आपका confidence अपने आप झलक जाएगा।

 

2 महीने, 4 महीना, 6 महीना हर एक घंटे अपने belief पर practice करे। उन बातों की script की practice करे जो आपको पसंद है। एक और technique है जो आपका confidence इतना easily बढ़ा सकती है कि आपको मालूम ही नही पड़ेगा। वो technique है गाना गाना- गुनगुनाना।  आपने देखा होगा कि जो लोग गुनगुनाते रहते है वो कितने मस्त होते है। भले ही माली हो homemaker हो, चपरासी हो या कोई बहुत बडा lawyer। गा तो कही भी सकते है। Shower लेते हुए गाइए खाना बनाते हुए गाइये, infact मैं कभी hospital में गई तो मेने देखा कि दो ladies जो blood test कराने आई थी वो भी गा रही थी.. किसी का गुनगुनाना कितना सुन्दर है। कितनी बार हम सबके घर में जो बाई काम करती है जो गुनगुना के, बिना किसी थकान के आराम से काम निपटा देती है और हम पढे लिखे MBA वाले corporate में job करने वाले लोग अपने आप को कितना कम आंकके सिर्फ एक second में ये कह देते है कि मैं presentation कैसे दूँ मेरी तो आवाज ही अच्छी नही है। गाना गाइए और practice कीजिये। It works ये पहला lesson था।

अब आई second lesson की बात। आप एक room में आते है जिसमे 15 -20 लोग है तो आप ये कैसे बता सकते है कि उस room में सबसे ज्यादा confident insaan कौन है? कौन सबसे emotionally strong है। कोई जानकार आपको इसका एक secret बताएगा। जो उस room में सबसे powerful है उसकी साँस उसकी breath हमेशा सबसे relaxed होगी।

 

हम हमारी रीढ़ की हड्ड़ी को control नही कर सकते पर हम हमारे unconscious को control कर सकते है। क्योकि हमारा unconscious हमारी breath हमारी साँस से control होता है। हमारी साँस हमारी relaxed confident power की एक चाबी है।

 

जो बड़े बड़े actors होते है उन्हें ये बात पता है। जब actors king play करते है, राजा बनते है तो वो बहुत ही still रहते है, शांत रहते है, ज्यादा हिलते भी नही। हर कोई राजा के आगे पीछे घूम रहा होता है। और राजा के उसी शांत और peaceful body language से हमे पता लगता है कि वो राजा है। जब कभी भी अगली बार आप nervous हो स्थिर रहने की कोशिश कीजिये, शांति अपने आप आ जाएगी और confidence, confidence शांति में है। वो इंसान ज्यादा confident होता है जिसे हर बार बोलने की जरूरत महसूस नही होती बजाए उस इंसान के जो अपने आपको कभी भी बोलने से रोक नही पता।

 

आपकी साँस को आप अपने diaphragm पर अंगूठा दबा कर भी control कर सकते है। आपका diaphragm आपके दोनों breast के नीचे center में होता है। इस जगह अपने अंगूठे से इस जगह को दबाये और साँस ले – आप पाएंगे की आपकी साँस बिना आपकी साँस के control किये जाने पर भी धीरे हो गई है। एक बार एक lady के साथ इतना बुरा हुआ कि किसी के साथ ना हो। Honeymoon पर ही उनके Husband की Heart Attack से death हो गई। ऐसा incident किसी को भी तोड़ के रख सकता है। ऐसे में बहुत guilt की feeling आती है – क्या मैंने कुछ गलत किया क्या मैंने खाने पीने का ध्यान नही रखा? जब बहुत महीने बीत जाने पर भी उनका दुःख कम नही हुआ तो उन्होंने इसी तरह अपने diaphragm पर अपना अंगूठा दबा के अपनी साँस को control किया। और बस कुछ ही दिनों में उनकी situation कितनी बार हमे अपने लिए नही पर दूसरे के लिए बोलने पर भी confidence चाहिए। आप कितना भी प्यार, गुस्सा क्यों न feel करते है अगर उसे express ही ना कर पाए तो इन feeling का क्या फायदा? क्या फायदा किसी को पसन्द करने का जब आप उसे बता ही ना पाय की आप उसे पसन्द करते है।

हमारी life हमारी साँस से चलती है। हमारे thought हमारी साँस की speed को control करते है। जब भी साँस अन्दर लेते है। आप अपने diaphragm पर अपना हाथ रखकर उस इंसान के बारे में सोचिये जिसे आप बहुत प्यार करते है। जब आप उसी साँस को बाहर निकालेंगे तो आप उस इंसान के लिए प्यार से भरे हुए होंगे। अब आप अगली साँस के साथ exited ही जाइये ये सोचकर की आने वाला time कितना excitement से भरा है और अब आप जब बोलेंगे तो आपकी आवाज excitement से भरी हुई होगी। आपकी आवाज को, आपके confidence को आप अपनी साँस से control कर सकते है। एक बहुत पुराना कथन है Inspiration & Respiration have the same root. प्रेरणा और साँस का एक ही स्त्रोत है- साँस अगर आपकी साँस- आपकी breathe आपके control में नही है तो आप बहुत बड़ा काम करना तो दूर बात भी नही कर पाएंगे।

हमारे ऋषि मुनि ये समझते थे की हम हमारे thoughts को हमारी साँस से अन्दर लेते है और जो भी हम बोलते है वो हमारी साँस के साथ ही बाहर आता है।

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भारत का एक बड़ा भाग about 78 % लोग अपने काम की वजह से बहुत stressed रहते है और हर 2 में से 1 इंसान के लिए खुश रहना एक चुनोती है। Infact कभी कभार हम सबके लिए खुश रहना एक बहुत बड़ी चुनोती है। पर आज आप एक ऐसी चीज सिखने जा रहे है जो जिंदगी का नजरिया बदल सकती है – वो है – आप किस तरह हंसे और बिना मतलब के हंसना सीखे। खुलकर हंसने के फायदे – Health Benefits of Laughter – Hasne ke Fayde in Hindi

Happier in 5 Minutes in Hindi

(5 Minute Mein Khush ho Jaye)

क्यों – क्योकि जब हम हंसते है तो हमारी body से उन chemicals की बाढ़ आ जाती है जो positive neurotransmitters से हमारे brain, हमारे nervous system और हमारे immune system को stimulate करती है।

Infact जब हम हंसते है तो हमारे blood circulation 50 % तक बढ़ जाता है इसलिए तो जब आप हंसते है तो आपके गाल लाल हो जाते है। और एक बात और सुनिये हँसने से आप कैलोरी भी burn कर सकते है। Laughter yoga को इंडिया के ही एक doctor Dr. Madan Mataria ने 1995 में start किया था। उन्होंने अपनी research में ये पाया कि हमारा mind और body असली और नकली हँसी में फर्क नही समझ सकता तो इसका मतलब हंसने के लिए हमे किसी comedian की जरूरत नही है, पर जब आपको बिना मतलब के हंसने के लिए कहा जायेगा तो आपको अजीब लगेगा। कुछ लोग तो हंसने की बात पर भी नही हँसते तो बिना हँसने की बात पर कैसे हंसेंगे। पर बस start करे ऐसे………….

इतना हंसे इतना हँसे इतना हँसे इतना हँसे कि आपके pretend करने पर भी आपको हंसी आने लग जाये।

थोड़ा awkward है पर अच्छा है। फालतू में हंसना हमे एक deep psychological level में सिखाता है कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते है उससे कुछ फर्क नही पड़ता। Ultimately आपको चाहिए क्या – एक healthy life. सबसे पहले आपको ये believe करना होगा कि आप खुश रहना, चहकते रहना deserve करते है।

तो आज हम वही करने वाले है, हम तब तक हँसने की practice करेंगे जब तक हम ये भूल न जाये क़ि हम हँसने क़ि practice कर रहे थे। क्योंकि science कहती है कि 45 to 90 seconds में ही blood circulation 50 % तक बढ़ जाता है और 2 minutes में नकली और असली हंसी का फर्क भी मिट जाता है। So here we go हँसने के लिए कौन कौन तैयार है, पहले अपनी साँस को पेट में भरे – ये हमारे lymphatic system में circulation को बढ़ाता है। अपने हाथो को ऊपर करे और अब लम्बी गहरी सांस को हाथो को नीचे ले जाते हुए हां की आवाज करे।

एक बार और पर इस बार आप सांस नीचे ले जाते वक़्त हसेंगे हां हां हां हां हां हां……. एक बार और हां हां हां हां हां हां……..

अब आपको अपना mobile निकालना है और ऐसे pretend करना है जैसे आपने अपने life की सबसे funniest story सुनी है। अपने नकली mobile को कान पर लगते हुए जोर जोर से हंसना है।

हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां…………………………………………

अब आपको एक ऐसी बात सोचनी है जो आपको बहुत परेशान कर रही है। जिसके बारे में सोच कर ही परेशान हो जाते है।

वो बात क्या है?

और ये हम इसलिए करेंगे ताकि हम अपने आप ये कह सके हम जितना सोचते है life उतनी हमारे control में होती ही नही है। हम हमारी life का हर outcome हमारे हिसाब से नही बदल सकते। पर हां हम अपना reaction जरूर change कर सकते है।

तो?….. आपकी life में क्या problem है? बीवी छोड़ के भाग गई है, सांस ने परेशान कर रखा है। बच्चे बहुत जिद्दी हो गए है। Phone का bill बहुत ज्यादा आया है। आप आपकी दिक्कत के बारे में सोचिये जैसे-phone का bill ज्यादा आया है और खूब हंसिये, हंसिये ना…… झिझक कैसी.. खूब हंसिये……….

आप पुरे 2-3 minute के लिए हँसे है और मैंने आपको एक भी joke नही सुनाया। जब हम बच्चे थे तो हम दिन में 300 बार हँसते थे और अब जब हम बड़े हो गए… जब हम इतने stressed है तो अब दिन में 30 बार भी नही हंसते है। Life को light बनाना आसान है बस 5 -10 मिनट के लिए फालतू का हंसिये। ये आपके हाथ में है कि आप अपना हर दिन कितना खूबसूरत बना सकते है। Decide बस आपको करना है। फिर से हंसिये….. हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां…………………………………………

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Self Esteem Tips in Hindi

अपने आप को पसन्द करना या high self-esteem होना अच्छा और बेहतर महसूस करने के लिए बहुत ही ज्यादा important है। पर लोग जैसा सोचते है self-esteem वैसे work नही करता है। आप सोचेंगे की आदमी बहुत बड़ा है तो बहुत high self-esteem होगी और छोटी पोस्ट पर है तो हमेशा दबा हुआ रहता होगा। कुछ लोग बहुत ही मामूली काम कर रहे होते है,  मोटे और भद्दे दिखते है और उनके बहुत ही unglamorous friends होते है पर उनका self-esteem फिर भी बहुत high होता है। वो काफी हद तक अपने आप को बहुत पसन्द करते है। भले दुनिया उन्हें पसन्द करे ना करे, भले ही उन्होंने कोई बड़ा काम ना किया हो वो अपनी दुनिया में मस्त है। आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीके Confidence Tips in Hindi

Self Esteem Tips in HindiConfidence Tips in Hindi

(Confidence Badhane ke Tips)

दूसरी category के लोग जिनके लिए कितना भी बड़ा achievement, prestige और कितना भी पैसा उन्हें अच्छा feel नही कर सकता है। वो हमेशा अपने आप को criticize करते रहते है, हमेशा अपने आप को कोसते रहते है, अपने आपसे हमेशा नाखुश रहते है और ये सोचते रहते है, कि वो इतने खराब है कि इस दुनिया में जीना भी deserve नही करते। जैसा की लोग समझते है high self esteem होना या अपने आप को पसन्द करने का सीधा सम्बन्ध कुछ बहुत बड़ा achieve करने से नही होता है।

हर इंसान का self esteem level एक बहुत ही personal point पर तय होता है। ऐसे कई factors है जो ये decide करते है कि ultimately आप अपने आप को कितना पसन्द करेंगे?

  1. आपके same gender parent का nature कैसा है और वो अपने आपको कैसा आंकते है। यानी की अगर आप लड़के है तो father का confidence कितना strong है वो matter करेगा और अगर आप लड़की है तो आपकी mother अपने आप को कितना important महसूस करती है।

क्या आपने अपने same gender के parents से ज्यादा achieve किया है या फिर कुछ कम achieve किया है?

ऐसा अधिकतर देखने में आता है कि एक positive level of self esteem उन लोगो में ज्यादा होता है जिन्होंने अपने same gender parents से ज्यादा achieve किया है। जिन लोगो का एक गरीब environment या background है यहाँ उनको एक advantage रहता है। शायद आपके पास एक छोटी सी car हो और आप एक कमरे में अपने परिवार के साथ रहते हो लेकिन अगर आपके माता पिता किसी छोटे से गांव में झुग्गी बस्ती में रहते थे तो फिर आपको कई बार किसी राजा महाराजा से कम महसूस नही होगा। वही कही आप एक ऐसे घर में पैदा हुए जहाँ पर बहुत महंगी महंगी गाड़ियाँ है, ऐशो आराम की हर चीज है और आपके पिता ने लाखो करोड़ो की सम्पति खड़ी की है पर आप एक simple middle class नौकरी कर रहे है तो आपका वजूद जो कि compression तो बहुत मामूली है-आपको हमेशा सताता रहेगा।

  1. Secondly आपके आस पास के लोग किस मुकाम पर है। इसमें आपको पूरी दुनिया से मतलब नही है but आपके immediate friends circle से, आपके peer group से जो भी लोग हमारे साथ पढ़े हुए है, जो भी लोग हमारे साथ बढे हुए है और जो हमारे आस पास ही रहते है और हमसे हमेशा मिलते रहते है। पूरी दुनिया में किसी को कितनी भी success क्यों ना मिल जाए हमे कोई फर्क नही पड़ता But ज्यादातर लोगो के लिए इससे बुरा bad luck और इससे बड़े दुःख की बात क्या हो सकती है कि उनके ही peer group में से किसी ने एक billion dollar company खड़ी कर दी है। हर बार जब भी हम अपने किसी ऐसे classmate से मिलते जिसने हमसे बेहतर किया है….हमारे अन्दर का past जैसे मर सा जाता है।
  2. Thirdly, आपको बचपन में किस तरह का प्यार था हमे बचपन में किस तरीके का affection मिला था। हमे प्यार किन conditions पर मिला था? हम में से काफी लोग ऐसे है जिनके parents को सिर्फ conditional love देना ही आता था। यानि की अगर तुम वैसा करते हो जैसा मैं चाहता हूँ तो ही मैं तुमसे प्यार करता हूँ। इसका सीधा संबन्ध school की grades से है। अगर हमारे marks अच्छे आये तो हम अच्छे बच्चे है और बुरे तो हम भी बुरे। हाँ शायद हमारे parents की इसी mentality ने हमे high achievers बनाया जिसकी वजह से हम अच्छी नौकरी पा सके, ठीक ठाक कमा सके- But ये ना कभी आसान था, ना है, ना रहेगा। हमेशा सिर्फ इसलिए best करना कि सामने वाले की नजर में हम अच्छे बने रहे- ये easy नही है। अपने आपको best करने के लिए इतना थका देना की आप completely exhaust हो जाय और थक जाय- ये सब easy नही है। Parents को हमेशा खुश रखना easy नही है।

कुछ बच्चे खुशनसीब होते है-उनके parents उनको उसी तरह से प्यार करते है जैसे वो है। उन्होंने दुसरो के approval के लिए कुछ खास नही करना पड़ता। उनको हमेशा ये feel कराया जाता है कि वो जैसे है वैसे ही बहुत ज्यादा matters करते है। वो 1st या 2nd आ जाय वो भी ठीक 8th या 10th आ जाये तो भी ठीक।

अगर आपके parents ने आपसे ज्यादा achieve किया है, अगर आपके peer group में सब आपसे बेहतर कर रहे है, अगर आपको हमेशा conditional love ही मिला है, वो दुनिया में कितनी भी मेहनत या कोई भी बड़ा medal ना जीत ले, उनका self esteem शुरुआत में तो basically low ही रहेगा।

अब इससे हमे ये मालूम पड़ता है कि life में हमारे क्या challenges है? सबसे पहले ये जान लीजिये कि किसी भी professional या economic achievement से हम अपने आप को बेहतर महसूस नही करा सकते। ऐसे हजारो करोड़ो लोग है जो बहुत famous है अरबो कमा रहे है पर जिनका self esteem level बहुत low है। इस problem का सीधा साधा solution है अपनी situation और अपने life experiences को जैसे है वैसे accept करना। हमारे thought को हम control करते है इसका मतलब तो ये हुआ कि हम जैसा feel करते है उसे भी तो control कर सकते है।

इसके लिए बहुत छोटे तौर पर start करना होगा। एक दिन में आप अपने आपको प्यार करना नही सीख सकते है ये एक पौधा उगाने की तरह है। पहले आप एक बीज बोयेंगे, फिर उसे लगातर पानी देंगे, ये ध्यान रखेंगे की सूरज की रौशनी उसे लगातर मिल रही है, उसे हवा मिल रही और फिर वो पौधा एक दिन मिटटी में से निकलेगा।

आप सिर्फ और सिर्फ अपने positive thoughts की volume को बढ़ाते जाये. अपने बारे में अच्छा सोचते रहे। इससे टाइम तो लगेगा लेकिन जब आप अभी अपने आप को ६ महीने पुराने वाले इंसान से कपरे करेंगे तो पायंगे की आप कितने better हो गए है। आप कितने खुश हो गए है और लाइफ में आप खुश रहना सबसे ज्यादा important है क्योंकि अगर आप खुश है तो आप दुसरो को खुश रख सकते है। हमारे अन्दर क्या अच्छा? ये सोचना हमे इतना difficult लगता है कि शुरुवात में तो अपने strong point निकालना भी किसी पहाड़ को तोड़ने जैसा लगता है। कई लोगो को जब कोई simple सा complement भी मिलता है जैसे कोई कहे कि “आपकी साड़ी कितनी अच्छी लग रही है” तो आप कहेंगे की ओह इसमें क्या इतना खास है- ये तो बस ऐसे ही है।

जो आपको सबसे पहली exercise करनी है अपने thoughts की volume को बहुत ज्यादा या कम करना। आपको positive thoughts का volume बहुत ज्यादा बढ़ा देना है-आपको बहुत सारे thoughts हो सकते है जैसे कि

  1. मैंने school में अपनी एक friend को bully किये जाने से बचाया था।
  2. मैं बहुत तेज भाग सकता हूँ।
  3. मुझमे बहुत हिम्मत है। मैं हर साल new year पर गरीब बच्चो को खाना खिलाता हूँ।
  4. मैं pasta बहुत अच्छा बना लेती हूँ।
  5. मैं बहुत शांत हूँ।

Negative thoughts को सुने लेकिन उसका volume कम करते जाये। लोग safe होने से ज्यादा बहुत important होना महसूस करना चाहते है। लोगो को कितना अच्छा लगता है जब हम उन्हें dinner पर बुलाते है और उनके थोड़ा भी late होने पर उन्हें वापस call करते है, लोगो को ये अच्छा लगता है की कोई आये और उन्हें important feel कराये। पर हम कब.. कब तक दूसरे लोगो का wait करे की वो आये और हमे validate करे।

अपने positive thoughts कि volume बढ़ाते जाये। अपने negative thoughts को सुने और delete बटन दबाये और अगली बार जब भी आपको कोई complement करे सीधा खड़े रहे, उनकी आँखों में देखे और दिल से कहे thank you.

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Study Tips in Hindi

हम हमेशा से ये ही चाहते है कि हमारे बच्चे school में बहुत अच्छा perform करे कि वो first आये, उनके teachers उनकी बहुत तारीफ पर तारीफ करे, वो अपना homework time पर करे, उन्हें कभी punishment ना मिले। हम ये सब हमारे बच्चो के लिए इसलिए चाहते है क्योकि हम school की success को लाइफ से relate करते है। हमारे लिए हमारे बच्चो का first आना इतना important है कि उसके लिए हम उन्हें school में 8 से 2 रहने के बावजूद, खाना खिलते ही फिर से tuition पर भेज देते है। हमारे लिए हमारे बच्चे की school में success life की success की एक पैमाना है। क्योकि वो अच्छे से पढ़ेगा तो अच्छी नोकरी पर लगेगा, फिर वो एक अच्छा घर खरीद सकता है और अच्छे से अपने परिवार का पालन पोषण कर सकता है पर हो कुछ उल्टा ही हो रहा है।  Infact 70-80% बच्चो के साथ कुछ बहुत ही confusing हो जाता है। Read Thoughts for Students in Hindi

Study Tips in HindiStudy Tips in Hindi

(School Mein Safal Hona Jaruri Nahi)

हम धीरे धीरे ऐसे लोगो से मिलने लगते है जो school में तो first आये है पर life में fail हो जाते है। जो बच्चे school में बहुत मुश्किल से पास होते थे वो आज खुश है, खूब कमा रहे है और बहुत ऐशो आराम से अपनी जिंदगी जी रहे है। स्कूल में हमे क्या सिखाया जाता है – कि हमे अपने teachers को satisfy करना है, हमेशा बड़ो कि बात माननी है, जो बच्चे शुरू से ही इतना obedient रहना सीख जाते है वो आज या तो बहुत ही नीची post पर काम कर रहे है या थोड़ी सी salary बढ़ाने के चक्कर में एक शहर से दूसरे शहर तक भटकते रहते है।

जो school में first आना guaranteed success की और इशारा करता था वो न जाने कब future की कब्र में जा बसता है। पर इसमें इतना surprise होने की क्या बात है। हमारे school का curriculum इस तरीके से design ही नही किया गया है कि वो हमे एक fulfilled औऱ satisfactory adult life की ओर ले जा सके।

हमारे school का curriculum आज का नही बल्कि सालों पुराणी सोच की एक उपज है। जिसका आज के time पर ज्यादा validity नही है। आप खुद ही सोचिये- Battle of Panipat किस date या किस साल में लड़ा गया था क्या ये रटना इतना important है? कोई युद्ध लड़ा गया था तो वो क्यों लड़ा गया था ये जाना जा सकता है पर वो युद्ध exactly किस तारीख को लड़ा गया था इसका हमारी जिंदगी और आने वाली जिंदगी से क्या सम्बन्ध है। School हमे ये suggest करता है जो भी important चीजे है इस दुनिया में वो सब हमे पता हो – हमे तो बस तोते की तरह रटना है ताकि हमें सब कुछ याद हो जाये।

2nd fact, 9th and 10th standers में भी जिन books में answers पहले से लिखे हुए होते है वही answer हमें copy में फिर से लिखने के लिए दिए जाते है ताकि रटने में रही कसर भी पूरी हो जाये।

आप किसी भी school के बच्चे से पूछ लीजिये, वो आपको बताएगा की अगर वो किसी question का answer थोड़े भी madam के बताये गए answer से अलग लिखता है तो उसके marks cut कर दिए जाते है। हमारे teachers हमें ये सिखाते है कि हमें जैसे वो चाहते है वैसे deliver करना है ना कि उनकी या इस दुनिया की expectation को change करना है।

School में वो सब चीजे सिखाई जाती है बजाए उन चीजो के जो हमारे लिए सबसे ज्यादा important है। School में हमें relationships के बारे में, व्यवहार के बारे में, लोगों से मिलने झूलने के बारे में, लोगों से सिखने के बारे में या सही लोगों का चुनाव करने के बारे में कुछ भी नही सिखाया जाता है।

3rd fact, हमें लोगों से compete कैसे करना है उसके बारे में सिखाया जाता है। हमें circle की circumference को कैसे मापन है ये तो सिखाया जाता है, हमें triangle का area मापन तो सिखाया जाता है पर हमें self esteem, self worth और confidence के बारे में कुछ भी नही सिखाया जाता है।

हमारा काम और हमारी love life, हमारी relationships हमारी ज़िन्दगी का सबसे important भाग है पर उसका क्या ज़िन्दगी का एक रटा answer है? बच्चे चीजो को absorb करना सीखे। क्योकि वो ध्यान ही लगाएंगे तो वो analyze ही नही कर पाएंगे की क्या सही है और क्या गलत।

जो बच्चे बाहर punishment में खड़े रहते है या जो पीछे बैठकर मस्ती करते रहते है वो life में इसलिए आगे निकल जाते है क्योकि उन्हें teacher के डांट दिए जाने पर भी डर नही लगता। वो छोटे मोटे डर से कई आगे निकल जाते है। Life को जीने के लिए सबसे important चीज ही तो courage है। मस्तीखोर बच्चे कभी teacher को satisfy या उन्हें please करने की कोशिश नही करते और life भी तभी खुल के जी जा सकती है जब आप हर इंसान को satisfy या please करना छोड़ दे। क्योकि आप कितना भी कर ले आप सबको खुश रख ही नही सकते। तो फिर ऐसी फालतू की कोशिशो पर अपना time waste किया ही क्यों जाये।

School के marks से जिंदगी नही चलती। जिंदगी के मायने और life का satisfaction में उतार चढ़ाव और ज़िन्दगी में emotional balance को maintain करना- Geography और maths के marks से कही ऊपर है?

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किशोरावस्था और यौवन की उत्सुकता

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Body Tips in Hindi

ये एक छोटी सी बच्ची है जिसका नाम Rhea है। Rhea ने बस अभी अभी चलना सीखा है और वो उसी funny तरीके से चलती है जैसे छोटे बच्चे चलते है। You know like…. मटक मटक के चलना। आपको पता है Rhea की favorite activity क्या है अपने आप को कांच में देखना। वो अपने आप को इतना पसन्द करती है कि घण्टो अपने आप को कांच में देखती रहती है। वो अपने आपको देखकर खुश होती रहती है, हंसती रहती है और कांच में अपने reflection को kiss करती रहती है। उसे ऐसी हरकते करते देखना इतना सूंदर लगता है कि ऐसा लगता है कि बस उसे प्यार से देखते ही रहो। अगर आप अपने mummy papa से पूछोगे तो वो आपको बताएंगे कि जब आप छोटे थे तो आप भी ऐसा ही किया करते थे। पर जैसे जैसे हम बड़े होते है हम ऐसा करना छोड़ देते है। एकदम से ऐसा क्या हो जाता है कि हमे लगता है कि अपने आप को हम जैसे है वैसे प्यार करना गलत है। Because ultimately हम अपने चेहरे को अपने शरीर को, अपने figure को प्यार करना छोड़ देते है। Read Self Respect In Hindi

Body Tips in HindiSelf Respect In Hindi

 

  • दस हजार लोग हर month Google से पूछते है कि क्या हम बदसूरत दिखते है। यकीन नही होता तो एक बार google करके तो देखिये बस type कीजिये ‘Am I Ugly ‘ और वो सारी websites मिल जाएगी जो आपको बताएगी कि आप बदसूरत है कि नही।
  • ये 13 साल की एक teenage लड़की है ये America में रहती है और किसी भी teenage लड़की की तरह ये अपने नए school में ‘fit in’ करने की तैयारी में है पर वो बहुत डरी हुई है। भले ही उसके parents ने उसे कितनी बार बोल दिया है कि वो सुन्दर है, उसके friends बार बार उसके looks में कोई ना कोई नुक्स निकालते है तो उसने अपना एक video बनाया और you tube पर upload कर दिया। उसने लोगो से request किया कि वो उसे बताये कि वो खूबसूरत है या बदसूरत। उसे अब तक 13000 comments आ चुके है।
  • कुछ इतने खराब है कि उन्हें पढ़ना भी गलत लगता है। ये एक average, healthy teenage लड़की के लिए लोगो द्वारा दिया गया feedback है जो अपनी age के सबसे नाजुक दौर से गुजर रही है। ये सिर्फ उसकी स्टोरी नही है, हजारों  लड़कियां इसी तरह की video you tube पर डाल रही है। ऐसा क्या है जो उन्हें दुसरो से पकने पर इतना मजबूर कर देता है? Well, आज के teenagers अकेले नही है। वो लगातार एक दूसरे को like, comment, share, post करते रहते है।
  • आज से पहले की कोई भी generation हर वक़्त और इतना ज्यादा और इतना जल्दी और इतनी कम उम्र में एक दूसरे से connected नही रही। आज के teenager की life ऐसी है कि वो अकेला है फिर भी मानो उसके मन में एक party चल रही है। हमेशा online और हरकत को notice करने वाली इस दुनिया में ना सिर्फ बच्चो को मगर हम भी like और comments से अपने आप को आंकना करना सिखा दिया है। हमे लगता है कि जो online है वही सच है जबकि जो online है वो ‘आधा सच’ है। लोग घूमने की pictures तो लगाते है पर लड़ाई करने की नही। लोग photos को edit करके उन्हें post करते है। लोग flight से जाने और travelling from लगाते है, 5 star hotel में dinner करने पर check in करते है पर बस से जाने पर और ढाबे पर खाने पर कुछ नही बोलते। लोग दिखाते ज्यादा है और होते कम है।
  • ये जो online दुनिया है ये आधी अधूरी दुनिया है of course अपनी appearance का ध्यान रखना important है पर किस कसौटी पर? एक इंसान की identity के बहुत सारे aspects होते है। जिसने appearance एक part है ना कि सब कुछ। आप खुद ही सोचिये अगर APJ Abdul Kalam ये ही सोचते रहते कि हाय राम! मैं handsome और सेक्सी क्यों नही हूँ तो क्या हमारे पास दूसरे देशों को डराने और अपने आपको safe रखने के लिए nuclear weapons होते?

हमारी relationships हमारे looks पर depend नही करती। अगर ऐसा होता तो Jiah Khan और Pratyusha Banerjee suicide नही करती। हमारे career हमारे looks पर depend नही करता। जो लड़के और लड़कियां बहुत सुन्दर है वो air host or hostess है ना कि किसी बड़ी company के CEO. यहां पर बात ये नही हो रही कि आप कैसे लगते है बल्कि यह हो रही है कि आपको क्या लगता है कि आप कैसे लगते है? Low Body Confidence आज की generation खा रहा है।

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खुलकर हंसने के फायदे – Health Benefits of Laughter

यह पूरा thought process हमें mentally से ज्यादा physically affect करता है। जिन teenage लड़कियों में low body confidence है वे पतला होने के लिए बहुत कम खाती है, जिससे वो और भी कमजोर होती जा रही है। Nutrition की कमी और इतनी low self esteem से वो इतना influenced है कि अगर उन्हें थोड़ा सा भी कोई भी कुछ भी कह दे तो उन्हें depression होने लग जाता है। फिर क्या? Alcohol, drugs, गलत relationships, crash diet, cosmetic, surgery और अपने आप को regularly तकलीफ पहुँचाने कि एक cycle शुरू हो जाती है।

एक survey के अनुसार 15% लड़कियों ने ये माना है कि वे interview सिर्फ इसलिए पास नही कर पाई क्योकि वो अपने looks के प्रति confident नही थी।

सोचिये एक ऐसा देश जिसकी आधी population सिर्फ यही सोचती रहती है कि मेरे होंठ पतले क्यों है? मेरी नाक इतनी मोटी क्यों है? मेरा color इतना काला क्यों है? 53% लड़कियों को जो सिर्फ 13 साल की है अपने looks से दुखी है, ये ratio 48% तक हो जाता है जब लड़कियां 17-18 साल की हो जाती है। आप खुद ही सोचिये ये insecurity वाली सोच क्या हमे आगे ले जा सकती है।

Friends से हर बार पूछना कि क्या मैं अच्छी लग रही हूँ? – क्या मैं अच्छी लग रही हूँ? एक बहुत ही छोटा व ओछा तरीका है। आप जैसे हो वैसे लग रहे हो हाँ! Lipstick या perfume लगा कर थोड़े और अच्छे लग सकते हो।

अपना body confidence बढ़ाने के लिए आपको कुछ core areas में धयन देना है:

  1. पहला- आपकी family और आपका relationships – आपके लिए क्या important है वो लोग जो आपका इतना ध्यान रखते है या वो कुछ एक friend जो हमेशा खुद को ऊँचा रखने के लिए आपके looks के अन्दर खोट निकालते है।
  2. Second चीज-ये जान ले कि जिन models की आप फोटो देखते है उनपर कई लोग काम करते है- makeup artist, photographers, hair dresser, dietitian, उन photos को खींचकर भी उनमे बहुत editing की जाती है। पतले होंठो को मोटा किया जाता है और मोटी कमर को पतला किया जाता है।

ISRO में जो women scientists काम करती है वे Katrina की तरह ठुमके नही लगा सकती। ना ही वो Ashwariya Rai जितनी सुन्दर है। तो क्या उन women scientists का कोई वजूद ही नही है। क्या होता अगर सारी की सारी ladies अपने चेहरे या body का रोना रो रही होती।

ये गलत है अगर हम अपने sportsperson के contribution को उनके haircut, उनके breast size से judge करे।

उन लोगों पर ध्यान दे जिनसे आप सबसे ज्यादा प्यार करते है। जब हमे कोई अच्छा महसूस कराता है तो हम उससे प्यार करने लगते है। जब हमारी कोई help करता है तो हम उसे पसन्द करने लगते है। इसमें looks क्या है? अपनी self esteem बढ़ाये और TV पर आने वाले लोगों से अपने आप को compare करना छोड़ दे। वो TV के लिए बने है- आप नही।

इस पूरी mentality को बदलने के लिए हमे लोगों को उनके काम से judge करना शुरू करना होगा ना की उनके looks से। ये जान लीजिये की आप पैदा हो गए है…. और जिस color, जिस नाक, जिस आंख के साथ आप पैदा हो गए है वो हमेशा वेसी ही रहेगी…. अब आप या तो जिंदगी भर दुखी हो सकते है या अपने आपको full confidence में लेकर अपने काम, अपने relationships पर अपना ध्यान लगा सकते है। यह सिर्फ आपके या मेरे करने से नही होगा बल्कि पुरे के पुरे culture को, community को बदलना होगा ताकि हम और हमारी आने वाली पीढ़ी अपने आप को पूरी तरह से value करना सीखे ना कि सिर्फ looks के पैमाने पर। ताकि ये और आने वाली generation कही इस बात से पिछड़ जाय की वो कैसे दिखते है और इस बात से आगे बढे की वो क्या है और क्या क्या कर सकते है।

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जब भी हम पर कोई गुस्सा करता है तो हम भी उस पर गुस्सा करने लग जाते है। हम एक मिनट भी यह नही सोचते की सामने वाले से जो हो गया है और सामने वाला जो करना चाहता है उसमे फर्क है। Read How to Control Anger in Hindi

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(Gusse ko Control Karne ke Tips)

बच्चे कई बार बिल्कुल irrationally behave करते है। बच्चे उन लोगो पर चिल्लाने लग जाते है जो उनकी सबसे ज्यादा care करते है। खाना फेंक देते है और कुछ नहाने पर भी रोने लग जाते है। Infact हम उनसे और ज्यादा प्यार से बात करते है, उनकी care करते है उन्हें सहलाते है। हम बच्चो पर क्यों चिढ़ते? हम बच्चो पर गुस्सा क्यों नही करते? ऐसा इसलिए करते है क्योकि हम जानते है कि बच्चो का कोई mean intention या बुरी भावना नही होती।

हम बच्चो के लिए तो ये assume करते है कि शायद उन्हें भूख लगी होगी, शायद वो थक गये होंगे, शायद वो छोटे बच्चे के आने की वजह से परेशान होंगे। पर जब ऐसी same situation बड़ो पर आ जाती है तो हम बिल्कुल ही उल्टा react करते है।

अगर कोई line में हमसे आगे आकर लग जाता है तो हमे instantly गुस्सा आ जाता है। हमे लगता है कि सामने वाला हमारे भोलेपन का फायदा उठा रहा है। पर अगर हम अपना interpretation बच्चो के हिसाब से करे जो शायद हमारे assumption बहुत different है। शायद उस इंसान को रात को नींद पूरी नही आई हो। शायद उनके घुटनो में दर्द है। या फिर शायद वो किसी relationship problem कि वजह से परेशान हो।

ऐसी और इससे भी बड़ी situation में शांत रहने की एक trick है। कभी भी ये न सोचे कि लोग बुरे है – आपको बस उस point को पकड़ना है जिसने उन्हें बुरा बनाया है। वो शायद अपनों से परेशान हो, अपने आप को शांत रखने के लिए आप ये सोच सकते है कि उन्होंने कहीं न कहीं बहुत suffer किया है और वो अपनी suffering को छुपाने के लिए गुस्सा कर रहे है।

दूसरे लोग कभी कभार बहुत खुश नजर आ सकते है लेकिन कुछ न कुछ है जो उन्हें परेशान करता है, वरना वो हमे क्यों परेशान करते?

जब कोई हम पर गुस्सा करता है तो हमे उन पर गुस्सा करने की बजाए ये सोचना है कि वो खुद अपने लिए नफरत, disappointment, failure और low self esteem से भरे हुए है। तो वो हम पर गुस्सा करके हमारा क्या कर लेंगे।

जो गुस्सा वो ऊपरी सतह पर बताते है उसके नीचे बहुत दुःख छुपा होता है। जैसे ही हम उनके दुःख को जान लेंगे हमारा उनपर गुस्से की बजाय दवा का भाव develop होगा।

जैसे ही हमारे अन्दर उनके लिए दया का भाव आएगा वैसे ही आप चाहकर भी उन पर गुस्सा नही कर पाएंगे। आप धीरे धीरे ये समझने लग जायेंगे कि आधे झगड़े तो एक reaction ना देने से ही खत्म हो जाते है। कुछ ना बोलने से, कुछ न react करने से दूसरे इंसान के दिमाग को ये सोचने का time मिलता है कि उसने क्या गलत किया होगा? अगर आप उस पर गुस्सा करते है तो वे ये सोचने लग जाता है कि उसे आगे गुस्से से क्या कहना चाहिए। लोगो को time देने से, कुछ न react करने से, उनके pain point को समझने से और उनके प्रति दया भाव रखने से ही बहुत शांति मिल सकती है

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पूरी दुनिया में 50% लोग अपनी शादी से खुश नही है। इनमें वो सभी शामिल है जिनका एक या दो बार divorce हो चुका हो, जिनके husband या wife का extra marital affair चल रहा है या फिर जो सिर्फ अपने बच्चों की वजह से साथ में है। Read Relationship Tips in Hindi

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(Rishto ko Sudharne ke Liye Tips)

क्या होता है जब हम किसी को बहुत ज्यादा like करने लगते है? हमे सब कुछ बहुत अच्छा लगने लगता है। सारे दुःख दर्द मिट जाते है। ये दुनिया हसीन लगने लगती है और सिर्फ हम में से कई लोगो को लाल झंडा दिखता है… extreme गुस्से की छोटी सोच की एक झलक, characterless की एक झलक पर हम सब कुछ ignore करने लग जाते है। First thought जो हमारे दिमाग में आता है वो ये कि शायद… हमने कुछ गलत किया होगा, शायद हमसे कोई गलती हुई होगी, लड़कियों को ये ज्यादा लगता है- अगर कोई उन्हें cheat कर रहा है तो उनका खुद का दिमाग कचरा बन जाता है। इस कचरे में सब कुछ शामिल है- मैं गोरी नही हूँ, मैं थोड़ी मोटी हूँ, मैं उतनी सुंदर नही हूँ। मेरी education बहुत अच्छी नही है। मेरी job high profile नही है, so basically- I deserve less. मुझे ज्यादा अच्छा मिलना ही नही चाहिए। मैं खुद क्या हूँ जो मुझे बहुत अच्छा मिले।

हम हमेशा अपने आप को मानते रहते है की सब कुछ सही है। हम अपने आपको ये बोलते है कि हर relationship में work तो करना ही पड़ता है.. जो सही भी है.. पर हम इसे गलत तरीके से ले लेते है। प्यार या ये प्यार वाली feeling हमे इतना अँधा बना देती है कि हम अपनी ही family से जो हमे सबसे ज्यादा जानती है उससे दूर रहने लगते है और झगड़ते रहते है। हम अपने friends और family से दूर हो जाते है। क्योकि हमे लगता है कि वो हमे हमेशा ज्ञान बाटते रहते है। हम 20-30 साल पुराने रिश्ते से दूर हो जाते है और उस इंसान के हो जाते है जो हमे सिर्फ कुछ हफ़्तों या महीने पहले मिला है।

But eventually जैसे जैसे time बीतता जाता है हमे ये realization होता है कि हम गलत थे और वो सब सही थे। हम इस पूरी situation से नफरत करने लग जाते है, अपने आप से नफरत करने लग जाते है, हम इतने hopeless हो जाते है कि हमे लगता है कि क्या हमे कभी कोई सही partner मिलेगा भी?

सबसे ज्यादा बेवकूफी कि बात यह है कि हम इस साइकिल को फिर से repeat करते है। हम फिर से एक गलत relationship में पड़ते है और हम पूरी तरह टूट जाते है। पर हम ऐसा क्यों करते है?

ऐसा हमारे brain… हमारे दिमाग कि वजह से होता है। हमारे दिमाग का जो past addiction को control करता है वही past love… प्यार को control करता है। हमे ये अच्छा लगता है कोई हमे प्यार करता है… हमे चाहता है भले ही वो इंसान हमारे लिए गलत क्यों न हो। भले ही हमे ये मालूम क्यों ना हो कि वो इंसान हमारे लिए गलत है। ये बिल्कुल drug या alcohol के नशे कि तरह है। हमें मालूम है की नुकसान ही नुकसान है पर drugs की तरह एक लत है। हम गलत लोगो को चुनते है और फिर उन्हें हमारे हिसाब से change करने की कोशिश करते है। हम शेर को चारा खिलाने की कोशिश करते है और खरगोश को मरा हुआ जानवर। जब शेर चारा नही खा पाता तो हम अंदर ही अंदर दुखी होते है।

हम कैसे सही लोगो को अपने लिए चुने?

जब भी लोग date पर जाते है या कहीं किसी से मिलते है तो वो मन ही मन ये hope कर रहे होते है की सामने वाला उन्हें like करे।

इसमें सही तरीका क्या होना चाहिए?

आपको ये hope करनी चाहिए कि आप सामने वाले को like करे आपको सामने वाले का assessment करना है कि क्या उसमे वो सब है जो आपको चाहिए? क्या सामने वाला आपको deserve करता है? क्या वो आपके लिए सही है? अगर आपका पूरा ध्यान सिर्फ इस चीज पर है कि सामने वाला आपको like करे, तो आप अपने आपको को इस तरह से represent करेंगे जो आप है ही नही, ऐसी mental state है कि आप सही decision ले ही नही सकते है। जब आप desperate होते है तो सामने वाले की आप हर वो चीज बता देते है जो आपको चाहिए। अगर सामने वालो को आप चाहिए तो कुछ दिनों, महीनों के लिए वो वैसा बन जाता है जैसा आपको चाहिए।

ये वो दो लोग है जो कुछ और होने की acting कर रहे है। जो देर सवेर असली इंसान बन कर एक दूसरे के सामने जरूर आयेंगे और फिर एक दूसरे को handle ही नही कर पायेंगे, क्योकि उनकी expecting ही कुछ और थी। ऐसी relationship कितने time तक चल सकती है। See we have to be really bold in knowing कि हमे क्या चाहिए। हमे जिद करनी है उस चीज के लिए जो हमारे लिए सबसे ज्यादा important है।

क्या आपके लिए freedom और independence बहुत matter करती है? तो फिर आपको एक ऐसा partner चाहिए जो broad minded हो।

कुछ लड़कियां कहती है कि हम उस लड़के के बारे में सोच ही नही सकते जो थोड़ी भी drink करता है। या जिसने कभी drink की हो। Well, ज्यादातर लड़के drink करते है या फिर उन्होंने कभी ना कभी कुछ लिया है। I mean, is that really important- क्या ये सच में इतना मायने रखता है? मतलब अगर कोई बिल्कुल ही काम नही करता वो समझ में आता है।

इन चीजो में हमे दिमाग से काम लेना है और सोचना है की सबसे ज्यादा किसी relationship में क्या important है? क्या होगा अगर हम अपने partner में honesty की जिद करे। क्या सामने वाला हमसे हमेशा सच बोलता है? सच बोलना ज्यादा important है या कभी drink नही करना ऐसी situation से आपको वही लोग बचा सकते है जो आपको सबसे ज्यादा जानते हो यानि आपके friends या family.

एक और बात, हमे अपने prospect को अपने best friend या family से मिलना है।

जब हम किसी को चाहने लगते है तो उसकी हर कमी को नजरअंदाज करके उसकी अच्छाइयों के बारे में ही सोचते रहते है। But हमारे friends या family हमारे prospect के साथ in love या dying to be in love वाली stage में नही होते है। वो situation और इंसान को भांपने की mentality में होते है और वो ही है जो हमे सही राय दे सकते है। अपने friend अपनी family पर trust करना सीखे क्योकि वो सही judgement करने की condition में होते है।

आपकी family हमेशा आपके लिए सही ही चाहेगी बस कुछ पाने के लिए desperate होना छोड़ दे। ये सोचना छोड़ दे की आपकी family आपसे jealous है या फिर अगर उनकी relationship ही सही नही रही तो वो आपको क्या राय देंगे? उनकी सुने। वो आपको प्यार करते है। True love is possible बस ना कहने और भाग जाने से डरे नही।

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इस दुनिया में 80% लोग ऐसे है जिन्हें अपना काम पसन्द नही। हो सकता है आप उन 80% में नही आते हो पर research तो यही बताती है। ये 80% लोग वो भी है जो IIT, IIM, Oxword या Harvord में पढे है। जिनके पास एक घर है और दूसरा भी, जिनके पास एक बीवी है और दूसरी भी। Read Career Tips in Hindi

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क्या फर्क है उन लोगो में जिनकी जिंदगी में passion होता है, जो दुनिया को बदल रहे है, जो रोज सुबह किसी inspiration के साथ उठते है और फिर वो बचे हुए 80% लोग जिनको लगता है कि उनकी जिंदगी बस एक भार है। जिनकी जिंदगी बस चल रही है… बस कट रही है।

वो 20% लोग जॊ अपने काम से खुश है उनमे सिर्फ 4 चीजे common है। अब इससे कोई फर्क नही पड़ता है कि वो jobs में है या सूरत में कपड़े की दुकान का कोई वयापारी। बस आप काम कर रहे है जो आपको पसन्द है।

जो 4 चीजे आपको जाननी है उसमे से सबसे पहला task है अपने आपको जानना और पहचानना। आप खुद ही सोचिये अगर आपको ये ही नही पता कि आप क्या चाहते है तो आपको वो मिलेगा कैसे। सबसे बड़ी बात ये है कि कोई भी दूसरा व्यक्ति हमे ये नही बता सकता की हमे क्या चाहिए। किसी भी university के किसी भी collage में कोई ऐसा course नही है जो हमे ये बताये की हमारा passion किस चीज में है, हम क्या करना चाहते है या फिर हमारी जिंदगी का purpose क्या है? हमे कौनसा TV खरीदना चाहिए ये सोचने में हम ज्यादा वक़्त लगा देते है बजाए ये सोचने के कि हमे क्या पढ़ना या सीखना चाहिए?

So आपका first step है अपनी core strength को पहचानना। आपको क्या काम करना सबसे ज्यादा पसन्द है। ऐसा कौनसा काम है जिसे आप बिना थके घण्टो कर सकते है भले ही आपको उसके पैसे मिले या ना मिले।

Second step है कोई एक decision लेना की हम सबसे ज्यादा किस चीज की care करते है? क्या हम सबसे ज्यादा लोगो की care करते है या फिर success और achievement की। हमारे decision किससे बने है। हमारी आत्मा किससे बनी है। हमारे morals क्या है। ये जानना इसलिए जरूरी है ताकि हम कोई ऐसा काम ना करते रहे जो हमारी आत्मा से जुड़ा हुआ नही है।

Third और आखिरी step है अपने experience को analyze करना। हमें हर रोज कोई ना कोई एक नया experience होता है, उन चीजो के बारे में जो हमे पसन्द है या जो हमे बिल्कुल नही पसन्द है, जिसे करने से हमे शांति मिलती है या जिसे करने से हमे गुस्सा आता है।

अगर हम इस चीज पे ध्यान ही ना दे कि हमे क्या करना सही लगता है और क्या करना गलत तो नये experience का फायदा ही क्या हुआ। हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने में कुछ समय सिर्फ ये analyze करने में लगाइये की आपसे क्या सही हुआ, क्या गलत हुआ और ऐसी क्या चीज है जिसे आप repeat नही करना चाहेंगे।

एक dairy maintain करे और उसमे लिखे की आपको सबसे ज्यादा क्या करना पसन्द है। जैसे ही आप उन सभी चीजो को जोड़ना शुरू करेंगे आप समझ जायेंगे की success के आपके लिए क्या मायने है। बिना अपने experience को analyze करे कुछ भी समझना impossible है।

कितने दुःख की बात है कि लोग ये पता लगाने की मेहनत भी नही करते की उनके लिए सबसे ज्यादा क्या matter करता है। वो उन चीजो के पीछे भाग रहे है जिसका उनसे कोई मतलब ही नही है, बस सब करे जा रहे है क्योंकि किसी ने कहा की ‘ये करना है’। अगर हम इन 3 steps को follow करे तो हम ये पता लगा सकते है की वो क्या चीज है जो हमे alive महसूस कराती है। हो सकता इससे पहले आपका passion आपसे टकराये या फिर आपके पास कोई ऐसा काम आये जिसे आप बहुत पसन्द करते हो, पर आप अपने उसी passion को पकड़ नही पायेंगे क्योकि आपने अभी तक अपने experience को analyze करके उन्हें identify करना नहीं सीख है। जैसे ही आप identify करना शुरू करेंगे की आपको क्या चाहिए – आपको ऐसी कितनी ही चीजे मिलनी चीजे शुरू हो जायेंगी जो आपकी core strengths, आपकी values, आपके morals से match करती है।

Passionate होने का सबसे आसान और fast तरीका है उन लोगो के साथ रहना जो खुद आपने काम को पसन्द करते है, जो वो काम कर रहे है जिसमें उन्हें मज़ा आता है। जो जिन्दा है।

Jim Rohan का एक quote है जिसमें वो कहते है कि ‘you are the avarage of the five people you spend the most time with’.

आप उन 5 लोगो का प्रतिबिम्ब करते है जिनके साथ आप सबसे ज्यादा वक़्त बिताते है। लोगो में आपको बदलने कि शक्ति होती है। आप recession या मन्दी को control नही कर सकते है। आप नोकरी से निकाल दिए जाने पर control नही कर सकते है। लेकिन ये 3 simple steps आपके हाथ में है। अगर आपको dance करना पसन्द है तो आप उन लोगो के साथ रहिये जिन्हें dance करना पसन्द है। अपने passion को find करना महात्मा गाँधी या Bill Gates जैसा बनाना नही है। ये सिर्फ उन चीजों को करना है जो आप पसन्द करते है।

या तो आप उन लोगो के साथ रह सकते है जो आपको ये बोले कि आप जो करना चाहते है वो नही कर सकते, आप बेवकूफ है या फिर आप उन लोगो के साथ रह सकते है जो आपको inspire करे motivate करे। इसके लिए हमे अपने आप पे काम करना पड़ेगा। क्योकि ये दुनिया उन 80% लोगो से बनी होनी चाहिए जिन्हें अपना काम पसन्द है।

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